यूपीआई पर शुल्क लगा तो 76 फीसदी लोग बदल सकते हैं भुगतान का तरीका

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डेस्क : यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाए जाने की चर्चा के बीच एक सर्वेक्षण में सामने आया है कि बड़ी संख्या में उपभोक्ता भुगतान का माध्यम बदल सकते हैं। सर्वेक्षण के अनुसार, यदि 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लिया जाता है, तो करीब 76 प्रतिशत लोग नकद, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या बैंक ट्रांसफर जैसे विकल्पों का इस्तेमाल करने पर विचार कर सकते हैं।

सर्वेक्षण में देश के 291 जिलों के यूपीआई उपयोगकर्ताओं को शामिल किया गया। इसमें 67 हजार से अधिक प्रतिक्रियाएं मिलीं। लोगों से पूछा गया कि यदि 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर व्यापारी अतिरिक्त शुल्क मांगते हैं तो वे किस विकल्प को चुनेंगे।

सर्वेक्षण के मुताबिक, 27 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे ऐसे मामलों में नकद भुगतान करना पसंद करेंगे। वहीं 26 प्रतिशत लोगों ने क्रेडिट कार्ड, 14 प्रतिशत ने डेबिट कार्ड और चार प्रतिशत ने बैंक ट्रांसफर, एनईएफटी या आईएमपीएस जैसे विकल्पों का इस्तेमाल करने की बात कही। करीब नौ प्रतिशत लोग बिना अतिरिक्त शुल्क वाले किसी अन्य डिजिटल भुगतान विकल्प को चुन सकते हैं। केवल 14 प्रतिशत लोग ही अतिरिक्त शुल्क देने के बावजूद यूपीआई से भुगतान जारी रखने के पक्ष में दिखाई दिए।

बड़े भुगतान पर पड़ सकता है असर

सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि 2,000 रुपये से अधिक की खरीदारी के लिए यदि यूपीआई पर अतिरिक्त लागत लगती है, तो उपभोक्ता दूसरे भुगतान माध्यमों की ओर रुख कर सकते हैं। बड़ी राशि के भुगतान में क्रेडिट कार्ड और नकद को प्राथमिकता देने वालों की संख्या अधिक रही।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के व्यक्ति से व्यापारी को किए जाने वाले यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लागू किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, 2,000 रुपये तक के यूपीआई भुगतान को इससे बाहर रखा गया है।

व्यापारियों पर भी असर की आशंका

एमडीआर को लेकर व्यापारियों के बीच भी चिंता है। सर्वेक्षण में बड़ी संख्या में कारोबारियों ने शुल्क का बोझ उठाने में असमर्थता जताई। व्यापारियों का कहना है कि यदि शुल्क का भार उन पर पड़ता है तो इससे उनके कारोबार की लागत बढ़ सकती है।

यूपीआई देश में डिजिटल भुगतान का सबसे प्रमुख माध्यम बन चुका है। ऐसे में बड़े लेनदेन पर शुल्क लागू होने की स्थिति में ग्राहकों और व्यापारियों के भुगतान व्यवहार में बदलाव देखने को मिल सकता है। इसका असर डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन पर भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है।