भारत-चीन संबंधों में सामान्य स्थिति के लिए सीमा पर शांति जरूरी: एस. जयशंकर

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नई दिल्ली :  विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को कहा कि भारत और चीन के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमा पर किसी भी तरह की अशांति का द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ेगा। ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम के प्रधान संपादक जॉन मिकलथवेट के साथ बातचीत में जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा का अब तक औपचारिक रूप से निर्धारण नहीं हुआ है और यह विवाद कई दशकों से चला आ रहा है।

जयशंकर ने कहा कि वर्ष 1975 से 2020 तक लगभग 45 वर्षों के दौरान भारत-चीन सीमा पर किसी सैनिक की जान नहीं गई थी। इस अवधि में दोनों देशों के संबंधों में भी प्रगति हुई। हालांकि, वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान सीमा पर कई घटनाएं हुईं, जिनका परिणाम दोनों पक्षों के सैनिकों की मौत के रूप में सामने आया। उन्होंने इसे 1975 के बाद सीमा पर बनी शांति की स्थिति से एक बड़ा विचलन बताया।

विदेश मंत्री ने कहा कि सीमा पर शांति भंग होने का असर दोनों देशों के संबंधों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। स्थिति को सुधारने के लिए कई वर्षों तक बातचीत करनी पड़ी और शांति बहाल करने में लगभग चार वर्ष का समय लगा। उनके अनुसार, वर्ष 2024 से सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति में काफी सुधार हुआ है और इसके साथ ही द्विपक्षीय संबंध भी धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं।

सीमा पर स्थिरता के साथ व्यापारिक संबंधों पर भी जोर

चीन के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने के सवाल पर जयशंकर ने कहा कि यदि दोनों देश सामान्य संबंध चाहते हैं, तो सीमा पर स्थिरता और शांति बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत व्यापार करने के लिए सीमा विवाद के पूर्ण समाधान को अनिवार्य शर्त नहीं बना रहा है, बल्कि उसकी अपेक्षा है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति कायम रहे।

चीन के साथ संभावित शुरुआती व्यापार समझौते और चीनी निवेश की संभावनाओं पर उन्होंने कहा कि इस दिशा में बातचीत जारी है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि निवेश, बाजार तक पहुंच और व्यापार संबंधी नीतियों पर अलग-अलग विचार किया जाएगा। सीमा विवाद और आर्थिक नीतियों को एक ही मुद्दे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

व्यापार असंतुलन पर जताई चिंता

जयशंकर ने भारत और चीन के बीच व्यापार असंतुलन तथा भारतीय कंपनियों को चीनी बाजार में पर्याप्त अवसर नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार का संतुलन एकतरफा है। भारत ने दुनिया के कई बाजारों में विभिन्न क्षेत्रों में अच्छी प्रगति की है, लेकिन चीन में भारतीय कंपनियों को कई क्षेत्रों में अपेक्षित बाजार पहुंच और कारोबार के अवसर नहीं मिल पाए हैं।

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत को चीन में वैसा समान अवसर नहीं मिल रहा है, जैसा भारत ने चीनी कंपनियों को अपने बाजार में उपलब्ध कराया है। उनके मुताबिक, भारत-चीन संबंधों में सीमा विवाद के अलावा आर्थिक चुनौतियां भी महत्वपूर्ण हैं, जिनका समाधान आवश्यक है।

संबंधों में सुधार के संकेत

इससे पहले सितंबर में न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम के दौरान भी जयशंकर ने भारत-चीन संबंधों में सुधार की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि वर्ष 2025 की तुलना में संबंध बेहतर हुए हैं और वर्ष 2024 के मुकाबले स्थिति में और अधिक सुधार आया है।

भारत और चीन के बीच संबंधों में हाल के दिनों में सुधार के संकेत मिले हैं। ऐसे में जयशंकर के ताजा बयान से स्पष्ट है कि भारत द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के पक्ष में है, लेकिन इसके लिए सीमा पर शांति, स्थिरता और व्यापार में समान अवसर सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण मानता है।