रूस से डीजल समझौते पर घिरे ट्रंप, 12 अमेरिकी सीनेटरों ने की रद्द करने की मांग

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डेस्क : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रूस के साथ डीजल आपूर्ति समझौते को लेकर अमेरिका में राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के 12 सीनेटरों ने इस समझौते का विरोध करते हुए इसे रद्द करने की मांग की है। सांसदों का कहना है कि रूस से डीजल की खरीद और उसकी बिक्री में छूट देने से मॉस्को को आर्थिक लाभ मिल सकता है, जिसका इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध में किया जा सकता है।

डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल के नेतृत्व में सांसदों ने इस मुद्दे पर ट्रंप प्रशासन को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति जताई। खास बात यह है कि विरोध करने वालों में रिपब्लिकन पार्टी के छह सीनेटर भी शामिल हैं। इससे स्पष्ट है कि रूस के साथ ऊर्जा कारोबार को लेकर ट्रंप को अपनी ही पार्टी के कुछ सदस्यों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

ईंधन की कीमतों पर नियंत्रण की कोशिश

ट्रंप प्रशासन की ओर से रूस के साथ डीजल आपूर्ति को लेकर उठाया गया कदम ऐसे समय आया है, जब अंतरराष्ट्रीय संघर्ष के कारण ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी प्रशासन का उद्देश्य बाजार में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाकर कीमतों पर दबाव कम करना बताया गया है।

रिपोर्टों के अनुसार, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने तत्काल तीन लाख टन से अधिक डीजल उपलब्ध कराने पर सहमति जताई थी। इसके अलावा नवंबर में पांच लाख टन अतिरिक्त डीजल की आपूर्ति की योजना भी सामने आई। रूसी मूल के डीजल से जुड़े कुछ लेन-देन के लिए अस्थायी अनुमति दिए जाने की भी जानकारी है।

हालांकि, समझौते के आलोचकों का मानना है कि इससे अमेरिकी उपभोक्ताओं को ईंधन की कीमतों में सीमित राहत ही मिल सकती है। इसके विपरीत, रूस को होने वाला आर्थिक लाभ यूक्रेन के खिलाफ उसके युद्ध प्रयासों को समर्थन दे सकता है।

रूस पर दबाव कमजोर होने की आशंका

सीनेटरों ने प्रशासन से रूसी डीजल से संबंधित अस्थायी अनुमति वापस लेने और रूस पर आर्थिक दबाव बनाए रखने की मांग की है। उनका तर्क है कि ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी तात्कालिक जरूरतों और रूस के खिलाफ अपनाई गई प्रतिबंध नीति के बीच संतुलन जरूरी है।

इस घटनाक्रम ने अमेरिकी विदेश नीति और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर ट्रंप प्रशासन ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सांसदों को आशंका है कि रूस के साथ इस तरह का समझौता मॉस्को पर दबाव बनाने की रणनीति को कमजोर कर सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि ट्रंप प्रशासन विरोध के बीच इस समझौते को लेकर क्या रुख अपनाता है।