धनतेरस पर सिर्फ गहने ही नहीं, सोने में निवेश के ये 5 विकल्प भी हैं खास

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डेस्क : धनतेरस और दिवाली के अवसर पर सोना खरीदना भारतीय परंपरा का अहम हिस्सा है। त्योहार के दौरान बड़ी संख्या में लोग सोने के गहने, सिक्के और बार खरीदते हैं। हालांकि, बदलते समय के साथ सोने में निवेश के कई नए विकल्प भी सामने आए हैं। अब निवेशक भौतिक सोने के अलावा गोल्ड ETF, गोल्ड म्यूचुअल फंड और डिजिटल गोल्ड जैसे माध्यमों पर भी विचार कर रहे हैं।

धनतेरस 2026 के मौके पर सोना खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए जरूरी है कि वे अपनी जरूरत और बजट के अनुसार विकल्प चुनें। हर विकल्प की लागत, जोखिम और खरीद-बिक्री की शर्तें अलग-अलग होती हैं।

गहने और सिक्के खरीदना अब भी लोकप्रिय

सोने के गहने खरीदना पारंपरिक रूप से सबसे लोकप्रिय विकल्प है। गहनों का इस्तेमाल पहनने और उपहार देने के लिए किया जा सकता है। वहीं, निवेश के उद्देश्य से सोने के सिक्के और बार भी खरीदे जाते हैं।

हालांकि, गहने खरीदते समय सोने की कीमत के साथ मेकिंग चार्ज और GST भी देना पड़ता है। दोबारा बेचने पर इन खर्चों की पूरी रकम वापस मिलना जरूरी नहीं है। ऐसे में खरीदारी से पहले हॉलमार्क, शुद्धता, वजन और पक्के बिल की जांच करना जरूरी है।

गोल्ड ETF और म्यूचुअल फंड से निवेश का विकल्प

जो लोग सोने को भौतिक रूप में रखने के बजाय वित्तीय माध्यम से निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए गोल्ड ETF और गोल्ड म्यूचुअल फंड विकल्प हो सकते हैं।

गोल्ड ETF की यूनिट शेयर बाजार में खरीदी और बेची जाती हैं। इसके लिए आमतौर पर डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट की जरूरत होती है। दूसरी ओर, गोल्ड म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश करने के लिए सामान्यतः डीमैट अकाउंट जरूरी नहीं होता। कुछ योजनाओं में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के माध्यम से नियमित निवेश की सुविधा भी मिलती है।

हालांकि, इन निवेश विकल्पों में प्रबंधन शुल्क और अन्य खर्च हो सकते हैं। सोने की कीमतों में गिरावट आने पर निवेशक को नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।

डिजिटल गोल्ड खरीदने से पहले सावधानी जरूरी

डिजिटल गोल्ड के जरिए लोग ऑनलाइन छोटी रकम से भी सोना खरीद सकते हैं। यह सुविधा उन लोगों को आकर्षित करती है, जो कम राशि से निवेश शुरू करना चाहते हैं।

लेकिन डिजिटल गोल्ड में निवेश करने से पहले संबंधित प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता, खरीद और बिक्री की कीमतों के अंतर, भंडारण शुल्क तथा सोना वापस लेने की शर्तों की जानकारी हासिल करनी चाहिए। डिजिटल गोल्ड को विनियमित निवेश उत्पादों जैसी सुरक्षा प्राप्त नहीं है। इसलिए केवल ऑनलाइन सुविधा देखकर निवेश करना उचित नहीं होगा।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में नए निर्गम उपलब्ध नहीं

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) भी सोने की कीमत से जुड़ा निवेश विकल्प रहा है। इन्हें भारत सरकार की ओर से भारतीय रिजर्व बैंक जारी करता रहा है। हालांकि, फिलहाल नए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जारी नहीं किए जा रहे हैं।

पहले जारी किए गए कुछ बॉन्ड शेयर बाजार में उपलब्ध हो सकते हैं। ऐसे बॉन्ड खरीदने से पहले उनकी मौजूदा कीमत, मैच्योरिटी, कारोबार की उपलब्धता और कर संबंधी नियमों को समझना जरूरी है। बाजार में इनकी कीमत मूल निर्गम मूल्य से अलग हो सकती है।

इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट भी एक विकल्प

इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (EGR) के जरिए भी निवेशक निर्धारित नियमों के तहत सोने में निवेश कर सकते हैं। यह भौतिक सोने से जुड़ी इलेक्ट्रॉनिक रसीद होती है, जिसका कारोबार स्टॉक एक्सचेंज पर किया जा सकता है।

इस विकल्प में निवेश करने से पहले उपलब्धता, लेनदेन की लागत, कारोबार की मात्रा और जरूरत पड़ने पर भौतिक सोना प्राप्त करने की शर्तों की जांच करनी चाहिए।

खरीदारी से पहले इन बातों पर दें ध्यान

वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, सोने में निवेश करने से पहले यह तय करना जरूरी है कि खरीदारी का उद्देश्य क्या है। यदि सोना पहनने या उपहार देने के लिए खरीदा जा रहा है, तो गहने उपयोगी हो सकते हैं। वहीं, निवेश के उद्देश्य से गोल्ड ETF या गोल्ड म्यूचुअल फंड पर विचार किया जा सकता है।

इसके अलावा, निवेशक को अपनी आर्थिक स्थिति, निवेश की अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता का आकलन करना चाहिए। केवल त्योहार या बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव को देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना चाहिए।

धनतेरस पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है, लेकिन सही विकल्प का चुनाव आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखकर करना चाहिए। किसी भी माध्यम से सोने में निवेश करने पर मुनाफे की गारंटी नहीं होती। इसलिए निवेश से पहले सभी शर्तों और संभावित जोखिमों को समझना जरूरी है।

डिस्क्लेमर: यह समाचार सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। इसे निवेश सलाह न माना जाए।