मुंबई : महाराष्ट्र की राजनीति में अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले भाजपा नेता और राज्य सरकार में मंत्री नितेश राणे ने दिवाली की खरीदारी को लेकर एक नया बयान दिया है। उन्होंने हिंदू समुदाय के लोगों से अपील की कि वे ऐसे दुकानदारों से सामान खरीदें, जो हिंदू धार्मिक परंपराओं से जुड़े हों और हनुमान चालीसा का पाठ करना जानते हों। उनके इस बयान ने धार्मिक पहचान और व्यापार को लेकर राजनीतिक बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नितेश राणे ने दिवाली के दौरान पटाखों और अन्य त्योहार संबंधी वस्तुओं की खरीदारी करते समय हिंदू दुकानदारों को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने तिलक लगाने, ‘जय श्री राम’ बोलने और हनुमान चालीसा या महाआरती का पाठ जानने वाले दुकानदारों से सामान खरीदने की अपील की।
खरीदारी और धार्मिक पहचान को जोड़ा
राणे ने अपने बयान में दावा किया कि गैर-हिंदू दुकानदारों से खरीदारी करने पर पैसा ‘जिहाद’ में जा सकता है। हालांकि, इस दावे के समर्थन में कोई प्रमाण सामने नहीं रखा गया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब त्योहारों के दौरान बाजार, व्यापार और धार्मिक पहचान को लेकर राजनीतिक बयानबाजी अक्सर चर्चा का विषय बनती है।
सिंहस्थ कुंभ मेले को लेकर भी रखी राय
नितेश राणे ने नासिक में होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले का उल्लेख करते हुए धार्मिक आयोजनों में प्रवेश और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कुंभ मेले में दुकानों और व्यापारिक गतिविधियों को हिंदुओं तक सीमित रखने की वकालत की। इस मुद्दे पर उनका रुख धार्मिक आयोजनों के प्रबंधन और व्यापार में धार्मिक पहचान की भूमिका को लेकर बहस को आगे बढ़ा सकता है।
नवरात्रि के दौरान भी दिया था बयान
नितेश राणे इससे पहले नवरात्रि और गरबा आयोजनों के दौरान भी पहचान की जांच तथा हनुमान चालीसा से जुड़े बयानों को लेकर चर्चा में रहे थे। दिवाली से पहले उनका ताजा बयान भी इसी राजनीतिक और धार्मिक विमर्श की कड़ी माना जा रहा है।
राणे के बयान से त्योहारों के दौरान खरीदारी में धार्मिक पहचान को प्राथमिकता देने का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।









