ट्रंप के ईरान समझौते पर अपनी ही पार्टी में विरोध, रिपब्लिकन नेताओं ने उठाए गंभीर सवाल


वॉशिंगटन :  अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए हाल ही में हुए अंतरिम समझौते को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी के भीतर तीखी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। समझौते के प्रमुख प्रावधान सार्वजनिक होने के बाद कई रिपब्लिकन सांसदों, पूर्व अधिकारियों और रूढ़िवादी विचारकों ने इसे अमेरिका के लिए जोखिमपूर्ण और ईरान के प्रति अत्यधिक नरम रुख वाला करार दिया है।

समझौते के तहत अमेरिका और ईरान ने 60 दिनों के भीतर एक व्यापक और स्थायी समझौते पर बातचीत करने पर सहमति व्यक्त की है। अंतरिम व्यवस्था के अनुसार अमेरिका ईरान के बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी समाप्त करेगा, जबकि ईरान वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण होरमुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही सुनिश्चित करेगा।

समझौते को लेकर विवाद का सबसे बड़ा कारण ईरान को मिलने वाली संभावित आर्थिक रियायतें हैं। रिपोर्टों के अनुसार, समझौते में ईरान के जमे हुए वित्तीय संसाधनों तक पहुंच, कुछ प्रतिबंधों में राहत तथा पुनर्निर्माण और निवेश से जुड़ी बड़ी आर्थिक व्यवस्थाओं का मार्ग प्रशस्त किया गया है। आलोचकों का कहना है कि इसके बदले अमेरिका को ऐसी सुविधाएं मिल रही हैं जो संघर्ष शुरू होने से पहले भी उपलब्ध थीं।

अमेरिकी सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति के अध्यक्ष रोजर विकर ने समझौते को ट्रंप प्रशासन के पूर्व घोषित उद्देश्यों के अनुरूप नहीं बताया। वहीं सीनेटर टेड क्रूज़ सहित कई रिपब्लिकन नेताओं ने आशंका जताई कि यह व्यवस्था ईरान को आर्थिक और रणनीतिक रूप से मजबूत कर सकती है।

रिपब्लिकन खेमे के कई प्रभावशाली रूढ़िवादी टिप्पणीकारों ने भी समझौते की आलोचना की है। उनका तर्क है कि अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा युद्ध के दौरान हासिल की गई रणनीतिक बढ़त इस समझौते के कारण कमजोर पड़ सकती है। कुछ आलोचकों ने तो इसे हाल के दशकों की सबसे बड़ी विदेश नीति संबंधी भूलों में से एक बताया है।

हालांकि ट्रंप ने इन आरोपों को खारिज करते हुए समझौते का बचाव किया है। उनका कहना है कि इस पहल ने क्षेत्र में शांति की संभावना बढ़ाई है, वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिरता प्रदान की है और लंबा खिंचने वाला संघर्ष टालकर विश्व अर्थव्यवस्था को संभावित नुकसान से बचाया है। ट्रंप का दावा है कि समझौते की घोषणा के बाद तेल कीमतों में नरमी और वित्तीय बाजारों में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली है।

इस बीच अमेरिकी कांग्रेस के कई सदस्यों ने समझौते के सभी प्रावधानों को सार्वजनिक करने और इसकी विधायी समीक्षा की मांग की है। व्हाइट हाउस ने समझौते का पाठ कांग्रेस को भेज दिया है, जिसके बाद आने वाले दिनों में इस पर व्यापक राजनीतिक बहस होने की संभावना है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता न केवल अमेरिका-ईरान संबंधों की दिशा तय करेगा, बल्कि रिपब्लिकन पार्टी के भीतर ट्रंप की विदेश नीति को लेकर मौजूद मतभेदों को भी उजागर कर रहा है। अगले 60 दिनों की वार्ताएं यह तय करेंगी कि यह पहल स्थायी शांति का आधार बनती है या फिर नए राजनीतिक विवादों का कारण।

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