आतंक फैलाने वाला देश सहयोग की उम्मीद नहीं कर सकता : यूएन में भारत


जिनेवा : भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में पाकिस्तान को कड़ा जवाब देते हुए कहा कि जो देश आतंकवाद को अपनी नीति का हिस्सा बनाकर उसका निर्यात करता है, वह सद्भावना और मित्रता पर आधारित सहयोग के विशेषाधिकारों की अपेक्षा नहीं कर सकता। भारत ने साथ ही सिंधु जल संधि को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप नहीं बताते हुए इसे समय से पीछे छूट चुकी व्यवस्था करार दिया।

यूएनएचआरसी के 62वें सत्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव अनुपमा सिंह ने ‘राइट ऑफ रिप्लाई’ के दौरान पाकिस्तान द्वारा भारत के खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बार-बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर द्विपक्षीय मुद्दों को उठाकर ध्यान भटकाने का प्रयास करता है।

अनुपमा सिंह ने कहा कि भारत का सिंधु जल संधि पर रुख पूरी तरह स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि यह तर्कसंगत नहीं है कि एक ऐसा देश, जो आतंकवाद को राज्य नीति के साधन के रूप में इस्तेमाल करता है, सहयोग और विश्वास पर आधारित व्यवस्था के लाभ मांगता रहे। उन्होंने कहा कि 1960 में हुई संधि को स्थायी अधिकार की तरह नहीं देखा जा सकता, क्योंकि बीते छह दशकों में परिस्थितियां और चुनौतियां पूरी तरह बदल चुकी हैं।

गौरतलब है कि पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का निर्णय लिया था। भारत सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था तब तक निलंबित रहेगी, जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के समर्थन को विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से समाप्त नहीं करता।

भारत ने यह भी रेखांकित किया कि पाकिस्तान की कृषि और जल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा सिंधु नदी तंत्र पर निर्भर है। पाकिस्तान की लगभग 80 प्रतिशत कृषि भूमि तथा कुल जल उपयोग का 93 प्रतिशत हिस्सा इसी प्रणाली से संचालित होता है।

पाकिस्तान की आलोचना करते हुए अनुपमा सिंह ने कहा कि भारत के क्षेत्रों पर दावा करने के बजाय पाकिस्तान को अपने आंतरिक संकटों और चुनौतियों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार परिषद में पाकिस्तान द्वारा समय-समय पर किए जाने वाले राजनीतिक प्रदर्शन अब अपनी प्रासंगिकता खो चुके हैं।

आतंकवाद के मुद्दे पर भी भारत ने पाकिस्तान को घेरा। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि यह विडंबना है कि पाकिस्तान स्वयं को आतंकवाद का शिकार बताता है, जबकि उसके ही वरिष्ठ नेताओं ने अतीत में आतंकियों को संरक्षण, प्रशिक्षण और समर्थन देने की बात स्वीकार की है। उन्होंने पाकिस्तान को एक ऐसा देश बताया जिसने जिन ताकतों को बढ़ावा दिया, आज वही उसके लिए चुनौती बन गई हैं।

जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान और इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) की टिप्पणियों को भी भारत ने सिरे से खारिज कर दिया। भारत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को लेकर लगाए गए आरोप निराधार, दुर्भावनापूर्ण और भ्रामक हैं। भारत ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग था, है और हमेशा रहेगा।

भारत ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर एकमात्र लंबित प्रश्न पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले भारतीय क्षेत्रों का है। यूएनएचआरसी में भारत के हस्तक्षेप ने आतंकवाद, सीमा पार शत्रुतापूर्ण गतिविधियों और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर नई दिल्ली की स्पष्ट और दृढ़ नीति को एक बार फिर सामने रखा।

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