डेस्क : भारत के पास सेमीकंडक्टर उद्योग में वैश्विक स्तर पर बने एक बड़े अवसर को भुनाने की क्षमता है और वह दुनिया भर में लगभग दस लाख पेशेवरों की प्रतिभा की कमी को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकता है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को कहा कि भारत इस तेज़ी से बढ़ते क्षेत्र में विश्वस्तरीय डिज़ाइन सुविधाएँ स्थापित करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
उन्होंने सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए विश्व की सर्वश्रेष्ठ डिज़ाइन सुविधाएँ स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और वैश्विक प्रतिभा अंतर को भरने में योगदान देने के लिए तैयार है।
मंत्री ने बताया कि वर्तमान में लगभग 800 अरब अमेरिकी डॉलर का वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग अगले एक वर्ष में बढ़कर लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच सकता है। इसके साथ ही यह क्षेत्र 2032 तक दुनिया भर में लगभग दस लाख नई नौकरियाँ भी पैदा करेगा।
उन्होंने कहा, “सेमीकंडक्टर उद्योग अभी लगभग 800 अरब डॉलर का है और यह अगले एक वर्ष में 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच सकता है।” उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले वर्षों में इस उद्योग में रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे।
अश्विनी वैष्णव ने यह भी रेखांकित किया कि इस क्षेत्र में अभी लगभग दस लाख कुशल पेशेवरों की कमी है, जो भारत के लिए एक बड़ा अवसर है। उन्होंने कहा, “इस एक मिलियन की कमी को पूरा करना हमारे लिए एक अवसर है।”
उन्होंने कहा कि इस अवसर का लाभ उठाने के लिए भारत को दो प्रमुख क्षेत्रों—डिज़ाइन और मैन्युफैक्चरिंग—पर समान रूप से ध्यान केंद्रित करना होगा। भारत इसके लिए विश्वस्तरीय डिज़ाइन सुविधाएँ विकसित करने को तैयार है।
इसी बीच, मंत्री ने रेलवे से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक भी की, जिसमें स्टेशन मास्टर्स की भूमिका को मजबूत करने, उनके सामने आने वाली चुनौतियों को समझने और रेलवे संचालन को अधिक सुरक्षित, कुशल और यात्री-केंद्रित बनाने के उपायों पर चर्चा की गई।


