नई दिल्ली: विदेश मंत्रालय (एमईए) ने एक ऐतिहासिक पहल करते हुए तोशाखाना में संरक्षित लगभग 300 बेशकीमती राजनयिक उपहारों की ई-नीलामी शुरू कर दी है। यह पहली बार है जब आम नागरिकों को सरकारी स्तर पर प्राप्त उपहारों की सार्वजनिक बोली लगाने का अवसर दिया गया है।
इन उपहारों में विदेशी दौरों के दौरान वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों को मिले लक्जरी और ऐतिहासिक महत्व के सामान शामिल हैं।
लग्जरी घड़ियों से लेकर चांदी के खंजर तक
नीलामी में शामिल प्रमुख वस्तुओं में रोलेक्स घड़ियां, सोने-चांदी के आभूषण, चांदी के खंजर, सजावटी कलाकृतियां, चांदी के बर्तन और अन्य संग्रहणीय वस्तुएं शामिल हैं। इन वस्तुओं को विभिन्न देशों के साथ हुए राजनयिक आदान-प्रदान के दौरान प्राप्त किया गया था।
पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम
सरकार ने इस पहल को पारदर्शिता और सार्वजनिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। यह नीलामी नई तोशाखाना नियमावली 2024 के तहत की जा रही है, जिसके अंतर्गत अब इन उपहारों का नियोजित और पारदर्शी तरीके से निपटान संभव हुआ है।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर हो रही बोली
यह पूरी प्रक्रिया ई-नीलामी पोर्टल के माध्यम से संचालित की जा रही है, जहां लोग निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी बोली लगा सकते हैं। नीलामी में वस्तुओं की शुरुआती कीमत कुछ हजार रुपये से लेकर लाखों रुपये तक रखी गई है, जो उनकी श्रेणी और दुर्लभता पर निर्भर करती है।
सरकारी खजाने में जाएगा राजस्व
नीलामी से प्राप्त होने वाली राशि भारत सरकार के समेकित निधि (कंसोलिडेटेड फंड ऑफ इंडिया) में जमा की जाएगी, जिससे यह धन सार्वजनिक उपयोग में आएगा।
यह कदम न केवल सरकारी संपत्ति के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ाता है, बल्कि आम जनता को भी ऐतिहासिक और राजनयिक महत्व की वस्तुओं से जोड़ने का अवसर देता है।


