भारत की बाह्य स्थिति मजबूत: अनिवासी दावेदारी में बड़ी गिरावट


मुंबई : भारतीय अर्थव्यवस्था की बाह्य स्थिति में जनवरी–मार्च 2025-26 की तिमाही के दौरान उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, देश पर अनिवासियों की शुद्ध दावेदारी (नेट क्लेम्स) 52.4 अरब अमेरिकी डॉलर घटकर मार्च 2026 के अंत तक 209.9 अरब डॉलर रह गई।

यह सुधार मुख्यतः दो कारणों से देखने को मिला—भारत में विदेशी स्वामित्व वाली परिसंपत्तियों में 40.1 अरब डॉलर की गिरावट तथा भारतीय निवासियों द्वारा विदेशों में रखी गई वित्तीय परिसंपत्तियों में 12.3 अरब डॉलर की वृद्धि।

भारतीय रिज़र्व बैंक ने स्पष्ट किया कि इस दौरान विनिमय दर में हुए बदलाव, विशेषकर प्रमुख विदेशी मुद्राओं के मुकाबले रुपये में आई गिरावट, ने भी बाह्य देनदारियों के डॉलर मूल्यांकन को प्रभावित किया।

विदेशी देनदारियों में कमी का प्रमुख कारण भारत में पोर्टफोलियो निवेश और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में गिरावट रही। हालांकि, रुपये के संदर्भ में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में वृद्धि हुई, लेकिन डॉलर में इसका मूल्य विनिमय दर में गिरावट के कारण कम हो गया।

दूसरी ओर, परिसंपत्तियों के पक्ष में भारतीय निवासियों के विदेशी प्रत्यक्ष निवेश का हिस्सा इस तिमाही में वृद्धि का 60 प्रतिशत से अधिक रहा। इसके बाद आरक्षित परिसंपत्तियों का स्थान रहा। देश की अंतरराष्ट्रीय वित्तीय परिसंपत्तियों में आरक्षित परिसंपत्तियों की हिस्सेदारी 57.1 प्रतिशत रही, जबकि विदेशी प्रत्यक्ष निवेश का योगदान लगभग एक-चौथाई दर्ज किया गया।

देश की अंतरराष्ट्रीय वित्तीय परिसंपत्तियों और देनदारियों का अनुपात भी सुधरकर मार्च 2026 के अंत में 85.2 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो दिसंबर 2025 के अंत में 82 प्रतिशत था। यह सुधार देश की बाह्य वित्तीय स्थिति में मजबूती का संकेत माना जा रहा है।

हालांकि, कुल बाह्य देनदारियों में ऋण आधारित देनदारियों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ती रही और यह मार्च 2026 के अंत तक 56.6 प्रतिशत पर पहुंच गई।

पूरे वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान अनिवासियों की शुद्ध दावेदारी में 119.2 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई। इसमें 42.8 अरब डॉलर की कमी बाह्य वित्तीय देनदारियों में आई, जिसका प्रमुख कारण रुपये का डॉलर के मुकाबले अवमूल्यन रहा। वहीं, भारतीय निवासियों की विदेशी वित्तीय परिसंपत्तियों में 76.4 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई।

भारतीय रिज़र्व बैंक के अनुसार, विदेशी परिसंपत्तियों में वृद्धि का मुख्य आधार विदेशी प्रत्यक्ष निवेश और आरक्षित परिसंपत्तियाँ रहीं, जबकि विदेशी पोर्टफोलियो और प्रत्यक्ष निवेश में कमी के कारण बाह्य देनदारियाँ घट गईं।

परिणामस्वरूप, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय परिसंपत्तियों और देनदारियों का अनुपात बढ़कर मार्च 2026 में 85.2 प्रतिशत हो गया, जो एक वर्ष पहले 77.5 प्रतिशत था। साथ ही, सकल घरेलू उत्पाद के मुकाबले अनिवासियों की शुद्ध दावेदारी का अनुपात भी सुधरकर (-)5.9 प्रतिशत पर आ गया, जो पिछले वर्ष मार्च में (-)9.0 प्रतिशत था, जिससे देश की बाह्य स्थिति में सुदृढ़ता के संकेत मिलते हैं।

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