अलीगढ़ हनीट्रैप कांड से भाजपा में हलचल, कई नेताओं के नाम चर्चा में; पुलिस जांच तेज

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डेस्क : उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में सामने आए हनीट्रैप कांड ने अब स्थानीय राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है। मामले में भाजपा से जुड़े दो लोगों के नाम सामने आने के बाद अब पार्टी के कुछ अन्य नेताओं और जनप्रतिनिधियों के नाम चर्चा में होने की बात सामने आई है। हालांकि, इन अतिरिक्त नामों की अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पुलिस की जांच में संकेत मिले हैं कि कथित हनीट्रैप गिरोह का नेटवर्क केवल दो मामलों तक सीमित नहीं था। पुलिस सूत्रों के अनुसार करीब 9 से 10 अन्य लोग भी इस गिरोह के जाल में फंसे हो सकते हैं। इनमें होटल कारोबारी, कचौड़ी विक्रेता और खैर क्षेत्र का एक ग्राम प्रधान भी शामिल बताया जा रहा है। कुछ लोग मंगलवार को पुलिस अधिकारियों के सामने अपनी आपबीती बताने पहुंचे, लेकिन सामाजिक बदनामी के डर से लिखित शिकायत देने से बच रहे हैं।

भाजपा नेता और चेयरमैन से लाखों की वसूली का आरोप

मामले की शुरुआत 5 अगस्त को भाजपा के महानगर मीडिया प्रभारी और अधिवक्ता निधीश कांत भट्ट की शिकायत से हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि एक महिला और वरिष्ठ अधिवक्ता ने उन्हें कथित हनीट्रैप में फंसाकर दो लाख रुपये वसूले। पुलिस ने इस मामले में काजल और उसके पति श्रवण कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

इसके बाद बरौली चेयरमैन मनोज सिंह ने भी क्वार्सी थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि गिरोह ने उन्हें नशीला पदार्थ पिलाकर आपत्तिजनक फोटो और वीडियो बनाए और उन्हें वायरल करने की धमकी देकर करीब आठ लाख रुपये वसूले।

डेढ़ साल से सक्रिय होने का दावा

पुलिस के मुताबिक आरोपियों के मोबाइल से मिले वीडियो और फोटो की जांच में गिरोह के करीब डेढ़ साल से सक्रिय होने के संकेत मिले हैं। कथित तौर पर सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों से संपर्क किया जाता था। इसके बाद उन्हें फ्लैट पर बुलाकर नशीला पदार्थ देने और आपत्तिजनक वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का आरोप है।

कई नेताओं के नाम चर्चा में, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं

भाजपा नेता निधीश कुमार भट्ट और बरौली चेयरमैन मनोज कुमार सिंह के नाम सामने आने के बाद स्थानीय भाजपा की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। पार्टी से जुड़े सूत्रों के हवाले से दो जनप्रतिनिधियों समेत कई नेताओं के नाम चर्चा में होने की बात कही जा रही है। इनमें कुछ ऐसे नेता भी बताए जा रहे हैं जो आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट की दावेदारी की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, पुलिस या पार्टी की ओर से इन अतिरिक्त नामों की पुष्टि नहीं की गई है।

पुलिस तलाश रही नामजद अधिवक्ता को

मामले में नामजद वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप कौशिक फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है और मोबाइल सीडीआर तथा लोकेशन की भी जांच की जा रही है। दूसरी ओर, अनूप कौशिक ने पुलिस अधिकारियों को पत्र भेजकर खुद को निर्दोष बताया है और आरोप लगाया है कि आगामी बार एसोसिएशन चुनाव से पहले उनकी छवि खराब करने की साजिश की जा रही है।

पुलिस का कहना है कि यदि कोई अन्य पीड़ित लिखित शिकायत देता है तो उसके आधार पर तत्काल मुकदमा दर्ज किया जाएगा। फिलहाल जांच का दायरा बढ़ता नजर आ रहा है और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित गिरोह ने कितने लोगों को अपना निशाना बनाया था।