जीवन बोध और आत्म-अवबोध का उपक्रम है स्वाध्याय : मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’

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जयपुर : जीवन को समझने और आत्मा के वास्तविक स्वरूप का बोध कराने वाला स्वाध्याय आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण माध्यम है। स्वाध्याय केवल पुस्तकों का अध्ययन नहीं, बल्कि जीवन में ज्ञान और आत्मचिंतन का प्रकाश जगाने का उपक्रम है। यह विचार बुधवार को अणुविभा केन्द्र, मालवीय नगर में आयोजित सेमिनार में मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने व्यक्त किए।

‘स्वाध्याय करने से जीव क्या प्राप्त करता है’ विषय पर आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ने कहा कि जिस पुस्तक के अध्ययन से जीवन का बोध और आत्मा का अवबोध हो, वही वास्तविक स्वाध्याय है। उन्होंने कहा कि भोजन तन की खुराक है, त्याग मन की खुराक है और स्वाध्याय मस्तिष्क की खुराक है।

मुनिश्री ने भगवान महावीर के संदर्भ में बताया कि स्वाध्याय के माध्यम से जीव ज्ञानावरणीय कर्म का क्षय करता है। ज्ञान पर पड़े आवरण हटने से व्यक्ति बुद्धिमान और प्रज्ञावान बनता है। उन्होंने कहा कि स्वाध्याय के माध्यम से ज्ञान के मार्ग में आए आवरणों को दूर कर व्यक्ति अपने लक्ष्य की ओर बढ़ सकता है।

मुनिश्री ने आगामी आध्यात्मिक उपक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि 14 से 21 अगस्त तक ‘मौन स्वाध्याय अट्ठाई’ का आयोजन किया जाएगा। इसमें प्रतिदिन एक घंटे मौन और एक घंटे स्वाध्याय का क्रम रहेगा। उन्होंने कहा कि यह उपक्रम कहीं भी किया जा सकता है और मौन के साथ स्वाध्याय करने से साधना अधिक प्रभावी बन सकती है। स्वाध्याय को सामायिक से जोड़कर करने पर इसके आध्यात्मिक लाभ और बढ़ जाते हैं।

मुनिश्री संभव कुमार जी ने कहा कि स्वाध्याय से कर्म निर्जरा के साथ-साथ जीवन में कई व्यावहारिक लाभ भी प्राप्त होते हैं। तनाव और अनिद्रा जैसी समस्याओं में भी स्वाध्याय सहायक हो सकता है। उन्होंने कहा कि स्वाध्याय अज्ञान का नाश कर ज्ञान का प्रकाश करता है और सफलता के लिए ज्ञान का होना आवश्यक है। इस अवसर पर उन्होंने ‘जय महावीर भगवान’ गीत का संगान कराया तथा श्रद्धालुओं से नमस्कार महामंत्र का जप भी करवाया।

कार्यक्रम का शुभारंभ तीर्थंकर शांतिनाथ जी की स्तुति से हुआ। इसके पश्चात तत्त्वज्ञान, तप प्रत्याख्यान और भरत मुक्ति व्याख्यान के माध्यम से उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को आध्यात्मिक ज्ञान से लाभान्वित किया गया। अंत में मंगलपाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।