ईरान पर फिर बड़े सैन्य अभियान की तैयारी, ट्रंप ने नहीं लिया अंतिम फैसला

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डेस्क : ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर फिर से सैन्य अभियान शुरू करने को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है, लेकिन पेंटागन को संभावित नए हमलों की तैयारी पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से Axios की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन ने कुछ दिन पहले अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) को ईरान में बड़े सैन्य अभियान दोबारा शुरू होने की स्थिति में आवश्यक तैयारियां पूरी करने को कहा था। हालांकि, हमले की कोई निश्चित तारीख तय नहीं की गई है।

अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों के अनुसार, सैन्य अभियान दोबारा शुरू होने की स्थिति में अमेरिका और इजरायल मिलकर कार्रवाई कर सकते हैं। संभावित हमलों में ईरान के ऊर्जा प्रतिष्ठानों, बुनियादी ढांचे और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है।

चुनावों से पहले हमले की अटकलें

Axios के मुताबिक, अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों के बीच इस बात की चर्चा बढ़ी है कि सैन्य कार्रवाई अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले भी हो सकती है। अमेरिका में मध्यावधि चुनाव 3 नवंबर को प्रस्तावित हैं, जबकि इजरायल में चुनाव इससे करीब एक सप्ताह पहले होने की संभावना है। हालांकि, एक इजरायली अधिकारी ने कहा कि चुनाव से पहले कार्रवाई की संभावना फिलहाल ज्यादा नहीं है, लेकिन इसे पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। मध्यावधि चुनाव के बाद इसकी संभावना काफी बढ़ सकती है।

ट्रंप की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ने शुक्रवार को कैंप डेविड में कई घंटे बैठक की। बैठक में युद्ध और अन्य विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। एक इजरायली अधिकारी के अनुसार, बैठक के एक हिस्से में ईरान में बड़े सैन्य अभियान दोबारा शुरू करने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बैठक के बाद कहा कि इसमें दीर्घकालिक विदेश नीति की योजना पर चर्चा हुई।

अमेरिका-ईरान वार्ता में नहीं हुई प्रगति

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में अब तक कोई खास प्रगति नहीं हुई है। कतर के मध्यस्थ अभी भी ईरान के जवाब का इंतजार कर रहे हैं। अमेरिकी जवाबी प्रस्ताव में ईरान से परमाणु कार्यक्रम को लेकर कई महत्वपूर्ण रियायतों की मांग की गई है।

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि ट्रंप के पास हर विकल्प खुला है। अधिकारी ने दावा किया कि अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण की स्थिति में है और ईरान की अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है। उन्होंने कहा कि ट्रंप के सामने दो रास्ते हैं—“आसान रास्ता या कठिन रास्ता”—और राष्ट्रपति अमेरिका के हित में उचित फैसला करेंगे।

नेतन्याहू से ट्रंप की बातचीत

ट्रंप ने बुधवार को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की। कुछ ही दिनों में दोनों नेताओं के बीच यह दूसरी बातचीत थी। अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, बातचीत में 7 अक्टूबर के हमले के पीड़ितों के प्रति स्मरण और सम्मान पर चर्चा हुई।

इससे पहले नेतन्याहू ने ईरान को लेकर अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ बैठक की थी। उन्होंने सोमवार को विदेश मंत्री रुबियो से भी बातचीत की थी।

यदि ईरान के खिलाफ फिर सैन्य अभियान शुरू होता है तो इजरायली सेना के भी इसमें शामिल होने की संभावना जताई गई है। इजरायली अधिकारियों का कहना है कि ईरानी नेतृत्व बेहद दबाव में है और उसे आशंका है कि उस पर एक और अचानक हमला हो सकता है। उनका दावा है कि ईरान पहले ही दो अप्रत्याशित हमलों का सामना कर चुका है।

होर्मुज पर ट्रंप का कड़ा रुख

इस बीच, ट्रंप ने बुधवार को वाशिंगटन से सैन एंटोनियो के लिए रवाना होते समय ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान की परमाणु क्षमता को खत्म कर दिया है। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के साथ युद्ध “बहुत जल्दी” खत्म हो जाएगा और इसके बाद तेल की कीमतों में भारी गिरावट आएगी।

ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास परमाणु क्षमता होती तो दुनिया को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता। उन्होंने दावा किया कि ईरान का सैन्य ढांचा बुरी तरह कमजोर हो चुका है।

इससे एक दिन पहले मैरीलैंड में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण को लेकर भी कड़ा बयान दिया था। उन्होंने अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी को ईरान के खिलाफ प्रभावी नाकेबंदी बताया और कहा कि समुद्री मार्ग से ईरान तक पहुंचने वाले जहाजों को रोका जा रहा है।

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस कार्रवाई को “ब्लॉकेड” के बजाय “वॉल ऑफ स्टील” कहता है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी नौसेना यह सुनिश्चित कर रही है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके।

ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका दुनिया की निर्विवाद नौसैनिक महाशक्ति बना रहेगा। साथ ही उन्होंने ईरान की सैन्य क्षमता को बेहद कमजोर बताते हुए कहा कि अब केवल यह तय करना बाकी है कि कार्रवाई “अच्छे तरीके” से की जाए या “इतने अच्छे तरीके से नहीं।”