डेस्क : पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। आम आदमी पार्टी की सरकार के खिलाफ बन रही नाराजगी और भाजपा को लेकर ग्रामीण पंजाब में कायम असंतोष के बीच कांग्रेस को अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने का मौका दिखाई दे रहा है। पार्टी अब उन मुद्दों को तलाश रही है, जिनके जरिए वह सत्तारूढ़ आप को घेरने के साथ भाजपा के बढ़ते प्रभाव को भी चुनौती दे सके।
पंजाब की राजनीति में किसान हमेशा से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में किसानों से जुड़े मुद्दे एक बार फिर राज्य की सियासत का केंद्र बनते नजर आ रहे हैं। बिजली, कृषि कर्ज, न्यूनतम समर्थन मूल्य और कृषि नीतियों को लेकर किसान संगठनों की नाराजगी ने आम आदमी पार्टी सरकार की चिंता बढ़ाई है। कांग्रेस इस असंतोष को अपने पक्ष में राजनीतिक माहौल बनाने के अवसर के तौर पर देख रही है।
आप के खिलाफ सत्ता विरोधी माहौल बनाने की कोशिश
2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने पंजाब में कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर बड़ी जीत हासिल की थी। भगवंत मान के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद पार्टी ने कई लोकलुभावन योजनाओं को लागू किया, लेकिन अब सरकार के सामने किसान संगठनों और विपक्ष के सवाल लगातार बढ़ रहे हैं।
कांग्रेस का प्रयास है कि किसानों के मुद्दों को लेकर सरकार को सीधे कठघरे में खड़ा किया जाए। पार्टी का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आप सरकार के खिलाफ पैदा होने वाला असंतोष अगर चुनाव तक कायम रहता है, तो इसका सीधा फायदा कांग्रेस को मिल सकता है।
भाजपा का बढ़ा वोट शेयर, लेकिन ग्रामीण चुनौती बरकरार
दूसरी ओर, पंजाब में भाजपा ने पिछले कुछ चुनावों में अपना वोट प्रतिशत बढ़ाया है। हालांकि पार्टी अभी भी ग्रामीण पंजाब में मजबूत आधार बनाने की चुनौती से जूझ रही है। किसान आंदोलन के दौरान भाजपा के खिलाफ बने माहौल का असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
यही वजह है कि कांग्रेस के लिए मौजूदा राजनीतिक स्थिति महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी एक तरफ आप सरकार की नाकामियों को मुद्दा बनाना चाहती है, तो दूसरी तरफ भाजपा को लेकर ग्रामीण मतदाताओं की नाराजगी को भी अपने पक्ष में बनाए रखना चाहती है।
2027 में त्रिकोणीय मुकाबले के संकेत
पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच मुकाबले को नया रूप दे सकता है। 2022 में आप ने जिस मजबूत स्थिति के साथ सत्ता हासिल की थी, उसके मुकाबले अब राजनीतिक परिस्थितियां बदल रही हैं। वहीं कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए संगठन को मजबूत करने और जमीनी मुद्दों पर सक्रिय होने की कोशिश कर रही है।
2024 के लोकसभा चुनाव में भी पंजाब के मतदाताओं ने किसी एक दल को स्पष्ट बढ़त नहीं दी। ऐसे में 2027 से पहले तीनों प्रमुख दलों के बीच वोटों का बिखराव और नए राजनीतिक गठजोड़ चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं।
कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती इस संभावित नाराजगी को अपने पक्ष में वोट में बदलने की होगी। पार्टी यदि किसान, ग्रामीण मतदाता और परंपरागत कांग्रेस समर्थक वर्ग को एक साथ जोड़ने में सफल रहती है, तो 2027 में पंजाब की सत्ता की लड़ाई काफी दिलचस्प हो सकती है।








