भारत-स्विट्जरलैंड साझेदारी का नया दौर, निवेश से रक्षा तक सहयोग बढ़ाने पर सहमति

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नई दिल्ली :  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन के बीच सोमवार को हुई व्यापक वार्ता के बाद भारत और स्विट्जरलैंड के द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने व्यापार और निवेश के साथ-साथ रक्षा, परमाणु ऊर्जा, बुनियादी ढांचे, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और लोगों के बीच संपर्क को और मजबूत करने का फैसला किया। वार्ता के बाद दोनों देशों ने प्रवासन एवं आवाजाही साझेदारी समझौते सहित कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

स्विस राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन सोमवार सुबह तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे। यह उनकी भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है। हालांकि, इस वर्ष वह दूसरी बार भारत आए हैं। इससे पहले वह फरवरी में आयोजित एआई इंपैक्ट शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत पहुंचे थे।

वार्ता के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि स्विट्जरलैंड में भारतीय निर्यात के लिए बाजार तक पहुंच बढ़ाने और दोनों देशों के बीच निवेश को आसान बनाने के लिए महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इससे भारत से स्विट्जरलैंड को कृषि उत्पादों, दवाओं, वस्त्रों और इंजीनियरिंग सामान के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। वहीं, जैव प्रौद्योगिकी, जीव विज्ञान, बैंकिंग, बीमा, खाद्य प्रसंस्करण और स्थिरता जैसे क्षेत्रों में स्विस निवेश को आकर्षित करने के प्रयास किए जाएंगे।

100 अरब डॉलर के निवेश का लक्ष्य

प्रधानमंत्री ने भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के बीच व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता निवेश, नवाचार, रोजगार और साझा समृद्धि के लिए एक महत्वाकांक्षी खाका है। इसके तहत अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में काम किया जाएगा।

मोदी ने कहा कि नवाचार, बुनियादी ढांचा और उन्नत प्रौद्योगिकी भारत-स्विट्जरलैंड साझेदारी के प्रमुख स्तंभ हैं। दोनों देश अब इन क्षेत्रों में सहयोग को नई गति देने के लिए आगे बढ़ रहे हैं।

रक्षा और परमाणु ऊर्जा में बढ़ेगा सहयोग

भारत और स्विट्जरलैंड ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई। इसके अलावा सैन्य आदान-प्रदान और रक्षा उत्पादन में सहयोग की नई संभावनाओं की भी पहचान की गई। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच बुनियादी ढांचा सहयोग के कई सफल उदाहरण पहले से मौजूद हैं।

उन्होंने वाराणसी में रोपवे, नोएडा के जेवर हवाईअड्डे तथा पहाड़ी क्षेत्रों में रेलवे और सुरंग निर्माण परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सहयोग के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। परिवहन और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए भी एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

मोदी ने स्विस बुनियादी ढांचा कंपनियों को भारत में बड़े पैमाने पर निवेश करने और क्षमता निर्माण, डिजाइन तथा विनिर्माण के क्षेत्र में भागीदारी का निमंत्रण दिया।

विज्ञान, स्वास्थ्य और अंतरिक्ष में संयुक्त शोध

प्रधानमंत्री ने भारत-स्विट्जरलैंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग को भी द्विपक्षीय संबंधों का मजबूत आधार बताया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में नई संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं शुरू की जाएंगी।

दोनों देशों ने लोगों के बीच संपर्क को भी महत्वपूर्ण बताया। मोदी ने कहा कि लोगों के बीच मजबूत संबंध भारत-स्विट्जरलैंड साझेदारी की सबसे बड़ी ताकत हैं।

छात्रों और युवाओं के लिए खुलेंगे नए अवसर

भारत और स्विट्जरलैंड ने प्रवासन एवं आवाजाही साझेदारी समझौते के साथ युवा पेशेवरों से जुड़े समझौते पर भी हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन समझौतों से भारतीय छात्रों, शोधकर्ताओं, पेशेवरों और युवाओं के लिए स्विट्जरलैंड में नए अवसर उपलब्ध होंगे।

वैश्विक शांति और संस्थागत सुधार पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन, संवाद और कूटनीति में विश्वास करते हैं। दोनों देश वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए मिलकर काम करते रहेंगे।

उन्होंने कहा कि यूक्रेन हो या पश्चिम एशिया, भारत ने शांति की दिशा में किए जाने वाले हर सार्थक प्रयास का समर्थन किया है। मोदी ने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

एआई सहयोग को भी मिलेगा विस्तार

प्रधानमंत्री ने बुधवार को होने वाले भारत-ईएफटीए समृद्धि शिखर सम्मेलन को व्यापार और निवेश साझेदारी को ठोस परिणामों में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने अगले वर्ष जिनेवा में एआई शिखर सम्मेलन के अगले संस्करण की मेजबानी करने के लिए स्विट्जरलैंड को शुभकामनाएं दीं।

मोदी ने कहा कि भारत ने इस वर्ष फरवरी में दुनिया के सबसे बड़े एआई शिखर सम्मेलनों में से एक की मेजबानी की थी और अब स्विट्जरलैंड जिनेवा एआई शिखर सम्मेलन के माध्यम से इस पहल को आगे बढ़ाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देश मिलकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता को जिम्मेदार, समावेशी और मानव-केंद्रित बनाने की दिशा में काम जारी रखेंगे।