डेस्क : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर प्रदेश की सियासत में हलचल तेज होने लगी है। इसी बीच रामपुर में हुई एक मुलाकात ने राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है। राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य रविवार को रामपुर पहुंचे और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के परिवार से मुलाकात की।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने आजम खान की पत्नी तंजीन फातिमा और उनके बेटे अदीब से करीब 45 मिनट तक बातचीत की। मुलाकात के बाद उन्होंने इसे शिष्टाचार भेंट बताते हुए परिवार का हालचाल जाना। हालांकि, मौर्य की हालिया राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए इस मुलाकात के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।
राहुल गांधी से मुलाकात के बाद रामपुर पहुंचे मौर्य
स्वामी प्रसाद मौर्य हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात कर चुके हैं। इसके बाद उन्होंने अपनी पार्टी के इंडिया गठबंधन में शामिल होने की बात भी कही थी। कांग्रेस की ओर से इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में मौर्य का आजम खान के परिवार से मिलना उत्तर प्रदेश की आगामी चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि, मौर्य ने राहुल गांधी से मुलाकात को लेकर सवाल पूछे जाने पर सीधे तौर पर कोई राजनीतिक टिप्पणी नहीं की। उन्होंने कहा कि रामपुर आने का उद्देश्य केवल शिष्टाचार और परिवार का हालचाल जानना था।
आजम खान के खिलाफ कार्रवाई पर सरकार को घेरा
मुलाकात के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य ने प्रदेश सरकार पर आजम खान और उनके परिवार के खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आजम खान के खिलाफ जिस तरह की कार्रवाई की जा रही है, उसका लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं है। मौर्य ने सरकार की नीतियों और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए।
सपा से रिश्तों में तल्खी के बीच कांग्रेस की नजर
आजम खान लंबे समय से समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुस्लिम चेहरों में रहे हैं और रामपुर में उनका मजबूत राजनीतिक प्रभाव माना जाता है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में आजम खान और सपा नेतृत्व के बीच मतभेद की चर्चाएं सामने आती रही हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में रामपुर से पार्टी प्रत्याशी को लेकर भी आजम खान की नाराजगी की खबरें सामने आई थीं।
ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले स्वामी प्रसाद मौर्य की रामपुर यात्रा ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या कांग्रेस और उसके संभावित सहयोगी आजम खान के प्रभाव को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल इसे लेकर कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।








