नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन के बीच सोमवार को हुई उच्चस्तरीय वार्ता में भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों को नई गति देने और व्यापार, तकनीक तथा प्रतिभा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने वार्ता के बाद बताया कि दोनों देशों ने आर्थिक साझेदारी, निवेश, तकनीकी सहयोग, प्रतिभा की आवाजाही, रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, अंतरिक्ष और कृत्रिम बुद्धिमत्ता समेत कई क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।
पार्मेलिन करीब एक दशक बाद भारत की द्विपक्षीय यात्रा पर आने वाले पहले स्विस राष्ट्रपति हैं। इससे पहले स्विट्जरलैंड की तत्कालीन राष्ट्रपति डोरिस ल्यूथर्ड ने अगस्त 2017 में भारत का दौरा किया था। वहीं, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सितंबर 2019 में स्विट्जरलैंड की द्विपक्षीय यात्रा की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 में स्विट्जरलैंड की आधिकारिक यात्रा की थी और 2018 में दावोस में विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक में भी हिस्सा लिया था।
TEPA बना आर्थिक साझेदारी का आधार
सिबी जॉर्ज ने कहा कि भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता (TEPA) दोनों देशों के आर्थिक संबंधों का प्रमुख आधार बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन से अगले 15 वर्षों में EFTA देशों से भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश का मार्ग प्रशस्त होगा और करीब 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
स्विट्जरलैंड भारत का 15वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 25 अरब डॉलर से अधिक है, जबकि भारत में स्विस निवेश 11 अरब डॉलर से ज्यादा पहुंच चुका है। भारत में करीब 340 स्विस कंपनियां फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स और वित्तीय सेवाओं समेत विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही हैं।
बुनियादी ढांचे में बढ़ रहा सहयोग
भारत के बुनियादी ढांचा क्षेत्र में स्विस कंपनियों की भागीदारी का उल्लेख करते हुए जॉर्ज ने कहा कि स्विस कंपनी वीएसएल इंजीनियरिंग जम्मू-कश्मीर में दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल चिनाब ब्रिज के निर्माण में शामिल है। वहीं, वाराणसी में देश की पहली शहरी रोपवे परियोजना में स्विस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
उन्होंने बताया कि स्विट्जरलैंड की फ्लुघाफेन ज्यूरिख कंपनी ने जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के विकास में निवेश किया है। दोनों देशों के बीच रेलवे पुलों और सुरंगों के निर्माण में भी सहयोग जारी है।
प्रतिभा और पेशेवरों की आवाजाही पर समझौते
भारत और स्विट्जरलैंड ने प्रतिभा की आवाजाही को बढ़ावा देने के लिए पांच प्रमुख समझौतों और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। इनमें माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप समझौता तथा यंग प्रोफेशनल्स के आदान-प्रदान से जुड़ा समझौता शामिल है। इनके जरिए कुशल पेशेवरों, छात्रों और शोधकर्ताओं की आवाजाही आसान होने की उम्मीद है।
नई व्यवस्था के तहत पांच वर्ष तक वैध मल्टीपल-एंट्री वीजा की सुविधा भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
एआई और उभरती तकनीक पर सहयोग
दोनों नेताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार, उन्नत विनिर्माण और प्रिसिजन इंजीनियरिंग जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की। स्विट्जरलैंड के जिनेवा में जून 2027 में होने वाले वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन के आयोजन में भारत ने हरसंभव सहयोग देने की इच्छा जताई है।
सिबी जॉर्ज ने कहा कि दोनों देशों का जोर एआई अनुसंधान, इसके जिम्मेदार और नैतिक इस्तेमाल तथा कौशल विकास पर रहेगा। हरित इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और स्वच्छ ऊर्जा नीति के क्षेत्र में भी संयुक्त परियोजनाएं चल रही हैं।
रक्षा सहयोग और स्वास्थ्य क्षेत्र में संभावनाएं
भारत ने स्विस कंपनियों को ‘मेक इन इंडिया’ के तहत रक्षा क्षेत्र में संयुक्त उत्पादन और विकास के अवसर तलाशने का आमंत्रण दिया है। दोनों देश रक्षा प्रशिक्षण और रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी विचार करेंगे।
स्विट्जरलैंड के उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में चिकित्सा, ट्रॉमा केयर और आपातकालीन प्रतिक्रिया के विशेष अनुभव को देखते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सहयोग की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इसके अलावा परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, जलवायु, पर्यावरण, शिक्षा, कौशल विकास और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे मुद्दे भी वार्ता के केंद्र में रहे।
भारत में निवेश बढ़ाने का आह्वान
प्रधानमंत्री मोदी ने स्विस विश्वविद्यालयों को भारत में अपने परिसर खोलने और स्विस वित्तीय संस्थानों को गुजरात के गिफ्ट सिटी में अपनी गतिविधियां शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया। भारत में करीब 30 हजार की भारतीय समुदाय की मौजूदगी को देखते हुए वित्तीय सहयोग को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सिबी जॉर्ज ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों का अगला चरण अब समझौतों को जमीन पर उतारने का है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों का लक्ष्य वार्ता से निकली सहमतियों को ठोस परियोजनाओं, साझेदारियों और परिणामों में बदलना है।
उन्होंने कहा कि पूरी बातचीत में ‘3टी’—Trade, Technology और Talent यानी व्यापार, तकनीक और प्रतिभा को भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों को आगे बढ़ाने का प्रमुख आधार बनाने पर स्पष्ट जोर रहा।








