नई दिल्ली : मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच विवाद गहरा गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर फॉर्म-6 में कथित तौर पर गैरकानूनी और एकतरफा बदलाव करने का आरोप लगाया है। राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव आयोग को इस तरह के बदलाव करने का अधिकार नहीं है और यह मामला चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा है।
राहुल गांधी ने अपने बयान में आरोप लगाया कि फॉर्म-6 में किए गए बदलावों के जरिए मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर भी सवाल उठाए और पूरे मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की।
हालांकि, चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए उनके दावे को भ्रामक बताया है। आयोग के मुताबिक, मूल फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया था। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान फॉर्म के साथ एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ा गया था। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था एसआईआर की प्रक्रिया के तहत की गई थी।
आयोग ने कहा कि एसआईआर से संबंधित प्रक्रिया के लिए जारी आदेश को आयोग ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी। आयोग के अनुसार, एसआईआर की अवधि समाप्त होने के बाद सामान्य मतदाता पंजीकरण के लिए निर्धारित फॉर्म-6 ही लागू रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट में भी उठा मामला
फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने फॉर्म-6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है। अदालत ने मामले में संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है और यह भी देखा जा रहा है कि फॉर्म में बदलाव किस प्रक्रिया के तहत किया गया।
विवाद का केंद्र उस अतिरिक्त घोषणा-पत्र को लेकर है, जिसे बिहार में एसआईआर के दौरान फॉर्म-6 के साथ जोड़ा गया था। इस घोषणा में आवेदक से उसके या उसके परिवार के सदस्यों के पुराने मतदाता रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी।
आरोपों पर सियासत तेज
फॉर्म-6 को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच बढ़ते विवाद ने राजनीतिक बहस को भी तेज कर दिया है। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची और मतदाता पंजीकरण से जुड़ी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि उसके द्वारा की गई प्रक्रिया निर्धारित नियमों और एसआईआर के प्रावधानों के तहत है।
मामला अब न्यायिक जांच के दायरे में है और सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई में फॉर्म-6 में किए गए बदलाव की प्रक्रिया तथा उसकी वैधानिकता से जुड़े सवालों पर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।








