डेस्क : राष्ट्रीय राजधानी में चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस के प्रदर्शन ने मंगलवार को जोर पकड़ लिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आकाशवाणी भवन में धरने पर बैठे कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। मौके पर नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) सचिन शर्मा समेत पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
कांग्रेस नेताओं ने यह धरना विपक्षी दलों के नेताओं को निर्वाचन सदन की ओर मार्च करने से रोके जाने के बाद शुरू किया। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सवाल उठाते हुए विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। कांग्रेस समेत विपक्षी दल इसे लोकतंत्र और मताधिकार से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रहे हैं।
इससे पहले दिल्ली पुलिस ने आकाशवाणी भवन के बाहर प्रदर्शन कर रहे युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के कई नेताओं को भी हिरासत में लिया। इनमें भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब भी शामिल थे।
कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने धरने के दौरान कहा कि पार्टी तब तक पीछे नहीं हटेगी, जब तक उसकी मांगें पूरी नहीं होतीं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि कांग्रेस नेता अपने रुख पर कायम हैं और लोकतंत्र की रक्षा के लिए आंदोलन जारी रखेंगे।
इससे पहले राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और चुनाव आयोग से विपक्षी नेताओं के साथ बैठक कर देशभर में मतदाता सूचियों के एसआईआर से जुड़े सवालों का जवाब देने की मांग की। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था तथा चुनावी प्रक्रिया को कमजोर करने का आरोप भी लगाया।
वहीं, इस बीच सोशल मीडिया पर चल रहे उन दावों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट हुई, जिनमें कहा गया था कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से संपर्क कर धरना समाप्त करने के लिए बातचीत की है। प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) की फैक्ट चेक इकाई ने इन दावों को भ्रामक और असत्य बताया।
पीआईबी फैक्ट चेक ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लोगों से अपील की कि वे अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा न करें और केवल सत्यापित एवं आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर विश्वास करें।







