मुंबई : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति ने बुधवार को रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया। करीब चार साल बाद रेपो रेट में बढ़ोतरी की गई है। आरबीआई का यह फैसला महंगाई, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और घरेलू अर्थव्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर बैंकों की कर्ज दरों पर पड़ सकता है। खासतौर पर फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन, कार लोन और अन्य खुदरा कर्ज महंगे होने की संभावना है। इससे मौजूदा कर्जदारों की ईएमआई बढ़ सकती है या लोन चुकाने की अवधि लंबी हो सकती है।
आरबीआई के फैसले का असर बचत और निवेश पर भी देखने को मिल सकता है। बैंक अपनी जमा और एफडी की ब्याज दरों में बदलाव कर सकते हैं। ऐसे में बचतकर्ताओं को आने वाले समय में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
केंद्रीय बैंक ने आर्थिक वृद्धि को लेकर भी अपना आकलन जारी रखा है। आरबीआई के मुताबिक भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बनी हुई है और आगे भी घरेलू मांग तथा आर्थिक गतिविधियों से विकास को सहारा मिलने की उम्मीद है।
रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद अब बैंकों की अगली रणनीति पर नजर रहेगी। ब्याज दरों में बदलाव का अंतिम असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अलग-अलग बैंक अपनी कर्ज और जमा दरों में कितना बदलाव करते हैं।








