लग्जरी आवास पर बढ़ा निवेशकों का रुझान, अफोर्डेबल हाउसिंग की हिस्सेदारी 10 फीसदी से नीचे

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डेस्क : भारत के रियल एस्टेट बाजार में निजी संस्थागत निवेशकों का रुझान किफायती आवास के बजाय लग्जरी और प्रीमियम घरों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। बेहतर मुनाफे, पूंजी में स्थिर वृद्धि और बड़े व उच्च गुणवत्ता वाले घरों की बढ़ती मांग के चलते निवेशक प्रीमियम आवासीय परियोजनाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। वहीं, सरकार किफायती और मध्यम आय वर्ग के आवास को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

रियल एस्टेट सलाहकार कंपनी वेस्टियन की बुधवार को जारी शोध रिपोर्ट ‘इंडियन रियल एस्टेट: की ट्रेंड्स ट्रांसफॉर्मिंग द इन्वेस्टमेंट लैंडस्केप’ के मुताबिक, वर्ष 2011 से सितंबर 2026 तक आवासीय क्षेत्र में हुए संस्थागत निवेश का 56 फीसदी हिस्सा लग्जरी और प्रीमियम आवास में गया। वहीं, किफायती और मध्यम आय वर्ग के आवास की हिस्सेदारी 44 फीसदी रही।

रिपोर्ट के अनुसार, देश में नए आवासीय प्रोजेक्ट की लॉन्चिंग में किफायती घरों की हिस्सेदारी में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। कोविड महामारी से पहले जहां नए आवासीय लॉन्च में किफायती घरों की हिस्सेदारी 50 फीसदी से अधिक थी, वहीं 2026 की पहली छमाही में यह घटकर 10 फीसदी से भी कम रह गई।

2017 में 20 फीसदी से बढ़कर 2025 में 60 फीसदी के पार पहुंची हिस्सेदारी

रिपोर्ट में बताया गया कि वर्ष 2017 में कुल आवासीय परियोजनाओं की लॉन्चिंग में लग्जरी और प्रीमियम घरों की हिस्सेदारी करीब 20 फीसदी थी, जो 2025 में बढ़कर 60 फीसदी से अधिक हो गई। निर्माण लागत में वृद्धि, खरीदारों की बदलती प्राथमिकताओं और बड़े आकार के बेहतर सुविधाओं वाले घरों की मांग ने इस बदलाव को गति दी है।

वेस्टियन के मुताबिक, लग्जरी रियल एस्टेट निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बनकर उभरा है। इसमें पूंजी के मूल्य में वृद्धि, महंगाई से बचाव और अपेक्षाकृत बेहतर किराये की आय की संभावनाएं निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार ने एक दशक से अधिक समय तक किफायती और मध्यम आय वर्ग के आवास को प्रोत्साहन देने के लिए डेवलपर्स और घर खरीदारों को विभिन्न सुविधाएं दीं, लेकिन बेहतर लाभप्रदता के कारण निजी निवेशकों की प्राथमिकता प्रीमियम आवास बन गया है।

अफोर्डेबल हाउसिंग में सरकारी फंड की अहम भूमिका

लग्जरी आवास में निजी निवेश बढ़ने के बीच किफायती और मध्यम आय वर्ग की आवासीय परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देने में सरकारी पहल की महत्वपूर्ण भूमिका बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019 से सितंबर 2026 के बीच किफायती और मध्यम आय वर्ग के आवासीय क्षेत्र में प्राप्त कुल निवेश में स्पेशल विंडो फॉर अफोर्डेबल एंड मिड-इनकम हाउसिंग (स्वामीह) फंड की हिस्सेदारी करीब आधी रही।

नवंबर 2019 में शुरू किए गए स्वामीह फंड-I का उद्देश्य रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) के तहत पंजीकृत ऐसी किफायती और मध्यम आय वर्ग की आवासीय परियोजनाओं को अंतिम चरण का वित्तपोषण उपलब्ध कराना था, जो धन की कमी के कारण अटकी हुई थीं।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस फंड की मदद से 146 परियोजनाओं में 58,596 से अधिक घरों का निर्माण पूरा करने में सहायता मिली है। वहीं, स्वामीह फंड-II को भी शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

आगे भी जारी रह सकता है रुझान

रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि आने वाले समय में बड़े निजी निवेशक लग्जरी और प्रीमियम आवासीय परियोजनाओं में निवेश को प्राथमिकता देते रहेंगे। दूसरी ओर, किफायती और मध्यम आय वर्ग के घरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए स्वामीह जैसी सरकारी पहल वित्तपोषण का प्रमुख माध्यम बनी रह सकती हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय आवासीय बाजार में निजी निवेश और सरकारी नीतियों की प्राथमिकताओं के बीच यह अंतर आगे भी बना रह सकता है। जहां निजी संस्थागत पूंजी का रुझान अधिक मुनाफे वाले प्रीमियम आवास की ओर रहेगा, वहीं सरकारी सहायता किफायती आवास परियोजनाओं को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।