घर में कितना सोना रखने पर नहीं होगी जब्ती? जानिए आयकर विभाग के नियम

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डेस्क : भारत में सोना-चांदी खरीदना और उसे सुरक्षित रखना लोगों की परंपरा का अहम हिस्सा है। शादी-ब्याह में मिलने वाले गहने, पुश्तैनी जेवर और सालों की बचत से खरीदी गई ज्वैलरी अक्सर घर या बैंक लॉकर में रखी जाती है। लेकिन जब इनकम टैक्स विभाग की ओर से तलाशी ली जाती है, तो एक सवाल लोगों के मन में जरूर आता है कि घर में कितना सोना-चांदी रखना सुरक्षित है और कितनी मात्रा में गहने मिलने पर विभाग उन्हें जब्त नहीं कर सकता।

आयकर विभाग के नियमों के मुताबिक, घर या बैंक लॉकर में सोना-चांदी रखने की कोई निश्चित अधिकतम कानूनी सीमा नहीं है। हालांकि, गहनों और कीमती धातुओं के वैध स्रोत की जानकारी देना जरूरी हो सकता है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के निर्देश संख्या 1916 में तलाशी के दौरान सोने के गहनों की जब्ती को लेकर कुछ मानक निर्धारित किए गए हैं।

महिलाओं और पुरुषों के लिए सोने के गहनों के क्या हैं मानक?

CBDT के निर्देश संख्या 1916 के अनुसार, आयकर विभाग की तलाशी के दौरान निर्धारित मात्रा तक सोने के गहनों को आम तौर पर जब्त नहीं किया जाता। ये मानक परिवार के सदस्यों की श्रेणी के आधार पर तय किए गए हैं।

  • विवाहित महिला: 500 ग्राम तक सोने के गहने
  • अविवाहित महिला: 250 ग्राम तक सोने के गहने
  • पुरुष सदस्य: 100 ग्राम तक सोने के गहने

इन मानकों का उद्देश्य तलाशी के दौरान गहनों की जब्ती से जुड़े मामलों में मार्गदर्शन देना है। इन्हें सोना रखने की अधिकतम कानूनी सीमा या पूरी तरह टैक्स-फ्री होने की गारंटी नहीं समझना चाहिए। संबंधित परिस्थितियों के आधार पर आयकर अधिकारी निर्धारित मात्रा से अधिक गहनों को भी जब्त नहीं करने का निर्णय ले सकते हैं।

क्या ज्यादा सोना रखने पर लग सकता है टैक्स?

घर में निर्धारित मात्रा से ज्यादा सोना होने का मतलब यह नहीं है कि उस पर अपने आप टैक्स लग जाएगा। यदि सोना वैध कमाई से खरीदा गया है या शादी में मिला है, उपहार के रूप में प्राप्त हुआ है अथवा विरासत में मिला है, तो उसके स्रोत को स्पष्ट करने वाले दस्तावेज उपयोगी हो सकते हैं।

सोने की खरीद के बिल, पुराने मूल्यांकन दस्तावेज, विरासत से जुड़े कागजात और अन्य उपलब्ध प्रमाण संपत्ति के स्रोत को स्पष्ट करने में मदद कर सकते हैं। यदि गहनों की मात्रा परिवार की आय और परिस्थितियों के मुकाबले अधिक दिखाई देती है, तो आयकर विभाग संबंधित व्यक्ति से स्पष्टीकरण मांग सकता है।

चांदी रखने की कितनी है सीमा?

सोने के गहनों की तरह CBDT के निर्देश संख्या 1916 में चांदी के लिए कोई निश्चित ग्राम या किलोग्राम की सीमा निर्धारित नहीं की गई है। इसका अर्थ यह नहीं है कि चांदी के स्रोत के बारे में कभी सवाल नहीं पूछा जा सकता।

यदि किसी व्यक्ति के पास बड़ी मात्रा में चांदी, चांदी के बर्तन या अन्य कीमती वस्तुएं हैं, तो जरूरत पड़ने पर उनके स्वामित्व और स्रोत से संबंधित जानकारी मांगी जा सकती है। ऐसे मामलों में खरीद के प्रमाण, विरासत के दस्तावेज और परिवार की आर्थिक स्थिति से जुड़े तथ्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

ITAT के फैसले से समझें पूरा मामला

मुंबई की आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) से जुड़े एक मामले में महिला के घर और बैंक लॉकर से सोने के गहने, शुद्ध सोना, हीरे जड़े आभूषण और करीब 11.2 किलोग्राम चांदी की वस्तुएं मिली थीं। महिला की ओर से इन संपत्तियों को शादी में मिले उपहारों, स्त्रीधन, विरासत और लंबे समय से जमा पारिवारिक संपत्ति से जुड़ा बताया गया।

न्यायाधिकरण ने मामले के तथ्यों और उपलब्ध स्पष्टीकरण पर विचार किया। इस मामले से यह समझा जा सकता है कि किसी व्यक्ति के पास सोना-चांदी मिलना ही उसे अघोषित संपत्ति मानने के लिए पर्याप्त नहीं है। संपत्ति का स्रोत, स्वामित्व और संबंधित परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण होती हैं।

हालांकि, इस फैसले के आधार पर यह नहीं माना जाना चाहिए कि हर व्यक्ति बिना किसी प्रमाण के इतनी ही मात्रा में सोना या चांदी रख सकता है। प्रत्येक मामले का निर्णय उसके तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाता है।

सोना-चांदी रखने वालों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

घर में सोना-चांदी रखने वालों के लिए बेहतर है कि वे खरीद के बिल, विरासत से संबंधित कागजात और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। शादी या पारिवारिक अवसरों पर मिले गहनों के मामले में भी उपलब्ध प्रमाण संभालकर रखना उपयोगी हो सकता है।

ध्यान रखें: सोना-चांदी रखने की कोई तय अधिकतम कानूनी सीमा नहीं है, लेकिन संपत्ति के वैध स्रोत को स्पष्ट कर पाना महत्वपूर्ण है। तलाशी के दौरान सोने के गहनों की जब्ती से संबंधित निर्धारित मानकों को पूरी तरह टैक्स-मुक्त सीमा समझना सही नहीं होगा।