डेस्क : भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता और इससे निपटने के लिए दोहरे मापदंड नहीं अपनाए जाने चाहिए। खास बात यह रही कि जब राजनाथ सिंह आतंकवाद के खिलाफ एकजुट कार्रवाई की बात कर रहे थे, उस समय पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार भी बैठक में मौजूद थे।
आतंकवाद के पूरे तंत्र को खत्म करने की अपील
SCO की काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट की 25वीं बैठक को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने आतंकवाद को शांति और विकास के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद केवल निर्दोष लोगों की जान नहीं लेता, बल्कि निवेश और व्यापार को भी नुकसान पहुंचाता है। इसके साथ ही यह समाज में कट्टरता को बढ़ावा देता है और युवाओं को उन अवसरों से दूर करता है, जिनके वे हकदार हैं।
रक्षा मंत्री ने कहा कि आतंकवाद को किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता। आतंकवादियों को आर्थिक सहायता देने वालों, उनका समर्थन करने वालों और उन्हें सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वालों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सभी सदस्य देशों से आतंकवाद के पूरे तंत्र को मजबूती और सामूहिक प्रयासों के साथ समाप्त करने का आह्वान किया।
इशाक डार की मौजूदगी में दिया स्पष्ट संदेश
राजनाथ सिंह का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उनके संबोधन के दौरान पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री इशाक डार उनके सामने ही बैठे थे। बैठक के बाद इस घटनाक्रम की चर्चा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हुई।
भारत लंबे समय से आतंकवाद और सीमा पार से होने वाली आतंकी गतिविधियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ठोस कार्रवाई की मांग करता रहा है। भारत का पक्ष है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सभी देशों को समान और स्पष्ट नीति अपनानी चाहिए तथा आतंकवादियों को संरक्षण देने वाले तंत्र पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
आतंकवाद के खिलाफ भारत का सख्त रुख
राजनाथ सिंह का यह बयान आतंकवाद के खिलाफ भारत की लगातार उठाई जा रही मांगों के अनुरूप है। भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाने के लिए ऑपरेशन सिंदूर चलाया था।
भारत का मानना है कि आतंकवाद का मुकाबला केवल निंदा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि आतंकवादियों को मिलने वाली आर्थिक मदद, समर्थन और सुरक्षित ठिकानों के नेटवर्क को भी खत्म करना जरूरी है।
SCO की बैठक में राजनाथ सिंह ने इसी दृष्टिकोण को सामने रखते हुए सदस्य देशों से सामूहिक प्रयास करने की अपील की। उनका संदेश स्पष्ट था कि क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास सुनिश्चित करने के लिए आतंकवाद के खिलाफ सभी देशों को एकजुट होकर कार्रवाई करनी होगी।









