डेस्क : भारत ने चीन और पाकिस्तान से लगी संवेदनशील सीमाओं पर रणनीतिक कनेक्टिविटी मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में तीन प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को आगे बढ़ाने जा रही है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य दुर्गम सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना की आवाजाही तेज करना, सैन्य उपकरणों और रसद की आपूर्ति सुगम बनाना तथा सीमांत गांवों को सालभर बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराना है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इन परियोजनाओं से जुड़ी निविदा प्रक्रिया और निर्माण की अगली प्रक्रियाएं अक्टूबर-नवंबर 2026 के दौरान आगे बढ़ने की उम्मीद है। परियोजनाओं की अंतिम लागत का पता निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद चलेगा।
जम्मू-कश्मीर में बनेगी सिंथनपोरा-वैलू ट्विन ट्यूब सुरंग
जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय राजमार्ग-244 पर प्रस्तावित सिंथनपोरा-वैलू ट्विन ट्यूब सुरंग परियोजना को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह मार्ग किश्तवाड़ और अनंतनाग जिलों को जोड़ता है, लेकिन सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण यहां यातायात प्रभावित होता है।
सुरंग के निर्माण से इस क्षेत्र में सालभर आवागमन की सुविधा बेहतर होने की उम्मीद है। इससे स्थानीय लोगों को भी लाभ मिलेगा। साथ ही, पीर पंजाल क्षेत्र में सुरक्षा बलों की आवाजाही और अग्रिम चौकियों तक आवश्यक सैन्य रसद पहुंचाने में मदद मिलेगी।
अरुणाचल प्रदेश में सड़क और पुलों का नेटवर्क होगा मजबूत
अरुणाचल प्रदेश में हुनली-अनिनी सड़क परियोजना (एनएच-313) और रणनीतिक पुलों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। चीन से सटे सीमावर्ती क्षेत्रों में बेहतर सड़क और पुल संपर्क से सैन्य वाहनों तथा भारी उपकरणों की आवाजाही आसान हो सकती है।
दिबांग घाटी जैसे दुर्गम क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ स्थानीय आबादी के लिए भी महत्वपूर्ण है। बेहतर कनेक्टिविटी से दूरदराज के गांवों तक पहुंच, परिवहन और आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता में सुधार होने की संभावना है।
सिक्किम में एनएच-10 को मिलेगा नया स्वरूप
सिक्किम में रंगपो से रानीपूल तक राष्ट्रीय राजमार्ग-10 को बेहतर बनाने की योजना है। यह मार्ग सिक्किम को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने के साथ-साथ नाथू ला जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र की ओर जाने वाली कनेक्टिविटी में अहम भूमिका निभाता है।
तीस्ता नदी घाटी में मानसून के दौरान भूस्खलन और सड़क क्षति की समस्या सामने आती रहती है। इसे ध्यान में रखते हुए परियोजना में भू-तकनीकी उपायों, सुरंगों और बाईपास सड़कों जैसे विकल्पों को शामिल किया गया है। इन कार्यों से सड़क की मजबूती बढ़ाने और खराब मौसम में यातायात बाधित होने की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ सीमावर्ती विकास पर भी जोर
सीमावर्ती क्षेत्रों में मजबूत बुनियादी ढांचा देश की रक्षा तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण है। बेहतर सड़कें, सुरंगें और पुल सेना को जरूरत के समय जवानों, वाहनों और आवश्यक सामग्री को तेजी से पहुंचाने में सहायता करते हैं।
इन परियोजनाओं का लाभ केवल सुरक्षा बलों तक सीमित नहीं रहेगा। सीमावर्ती गांवों में रहने वाले नागरिकों को भी बेहतर परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और आर्थिक गतिविधियों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, परियोजनाओं की वास्तविक प्रगति और उनके पूरा होने की समयसीमा निविदा, निर्माण कार्य तथा दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।









