डेस्क : इटली के मिलान शहर में हिंसक प्रदर्शनों, लूटपाट और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं के बाद प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने का फैसला किया है। सरकार ने हिंसक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए सख्त कानूनी प्रावधानों को मंजूरी दी है। इसके साथ ही मिलान में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए साल के अंत तक 500 अतिरिक्त सैनिक तैनात किए जाएंगे।
मिलान में सप्ताहांत के दौरान आयोजित प्रदर्शनों ने उस समय हिंसक रूप ले लिया, जब प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट की। कई स्थानों पर सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल करना पड़ा। अधिकारियों के मुताबिक, हिंसा के दौरान 100 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।
हिंसा करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
प्रधानमंत्री मेलोनी ने हिंसा की घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि युवाओं का बड़ी संख्या में ऐसी गतिविधियों में शामिल होना गंभीर विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इसके नाम पर हिंसा, लूटपाट और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
सरकार के नए प्रावधानों के तहत हिंसक प्रदर्शनों में शामिल लोगों के लिए अधिकतम पांच साल तक की जेल और 20 हजार यूरो तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। हिंसा के दौरान चेहरा ढकने या किसी व्यक्ति के घायल होने जैसी परिस्थितियों में अतिरिक्त सख्ती बरती जा सकती है। संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से उसकी भरपाई भी कराई जाएगी।
नाबालिगों के मामलों में भी सख्ती
सरकार ने हिंसक गतिविधियों में शामिल किशोरों के मामलों में भी सख्त रुख अपनाया है। नए प्रावधानों के तहत नाबालिगों द्वारा संपत्ति को नुकसान पहुंचाए जाने पर उनके माता-पिता को भी आर्थिक रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकेगा। सरकार किशोर हिरासत केंद्रों की क्षमता बढ़ाने और न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी कदम उठा रही है।
करीब 50 लोग गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार, सप्ताहांत के दौरान हुई हिंसा के सिलसिले में करीब 50 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें 30 से अधिक नाबालिग बताए गए हैं। अधिकारियों ने घटनाओं की जांच शुरू कर दी है और हिंसा में शामिल लोगों की भूमिका का पता लगाया जा रहा है।
प्रदर्शन की शुरुआत महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत जैसे मुद्दों को लेकर निकाले गए मार्च से हुई थी। शुरुआत में मार्च शांतिपूर्ण था, लेकिन बाद में कुछ प्रदर्शनकारियों की हिंसक गतिविधियों के कारण स्थिति बिगड़ गई। सरकार का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था के साथ कानूनी कार्रवाई को भी प्रभावी बनाया जाएगा।
सरकार के इन नए प्रावधानों को स्थायी कानून का रूप देने के लिए संसद की मंजूरी आवश्यक होगी। इसके लिए 60 दिनों की समयसीमा निर्धारित की गई है।









