डेस्क : मशहूर गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने अभिनेत्री रश्मिका मंदाना के हिंदी उच्चारण और लहजे को लेकर उन्हें ट्रोल करने वालों की आलोचना की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि किसी व्यक्ति के भाषा बोलने के तरीके का मजाक उड़ाना और अपनी भाषा को दूसरों से बेहतर समझना गलत है। जावेद अख्तर के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भाषा, उच्चारण और क्षेत्रीय पहचान को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
रश्मिका के समर्थन में उतरे जावेद अख्तर
दरअसल, रश्मिका मंदाना हाल ही में अपने पति और अभिनेता विजय देवरकोंडा के साथ चर्चित शो ‘कॉफी विद करण’ में नजर आई थीं। इस दौरान उन्होंने अपने करियर में होने वाली ट्रोलिंग के बारे में बात की। अभिनेत्री ने बताया कि उन्हें अभिनय, प्रदर्शन और भाषा के साथ-साथ अपने एक्सेंट यानी बोलने के लहजे के लिए भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है।
रश्मिका की इसी बात के बाद जावेद अख्तर ने उनके समर्थन में आवाज उठाई। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि जिन लोगों को रश्मिका के उच्चारण से परेशानी है, उन्हें तमिल भाषा की कुछ पंक्तियां बोलने के लिए दी जानी चाहिए, ताकि पता चले कि वे उस भाषा का उच्चारण कितनी अच्छी तरह कर पाते हैं।
जावेद अख्तर ने भाषा के आधार पर खुद को श्रेष्ठ समझने की सोच को गलत बताते हुए कहा कि इस तरह की झूठी और बेबुनियाद भाषाई श्रेष्ठता स्वीकार नहीं की जा सकती।
रश्मिका ने भी कही थी अपनी बात
शो के दौरान रश्मिका ने बताया कि वह अपने करियर में खुद को किसी एक भाषा या फिल्म इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रखना चाहती थीं। वह अलग-अलग भाषाओं में काम करना और विभिन्न फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा बनना चाहती थीं।
अभिनेत्री के मुताबिक, दक्षिण भारतीय होने के कारण उनके बोलने के तरीके में दक्षिण भारतीय लहजा होना स्वाभाविक है। ऐसे में केवल उच्चारण के आधार पर किसी कलाकार को निशाना बनाना उचित नहीं है।
रश्मिका की यह बात उन लोगों के लिए भी एक संदेश मानी जा रही है, जो कलाकारों के अभिनय के बजाय उनके भाषा बोलने के तरीके को लेकर आलोचना करते हैं।
पोस्ट में रश्मिका की पहचान को लेकर हुई गलती
जावेद अख्तर ने अपने शुरुआती पोस्ट में रश्मिका को तमिल अभिनेत्री बताया था। इस पर सोशल मीडिया यूजर्स ने सुधार करते हुए बताया कि रश्मिका मंदाना कर्नाटक के कोडागु क्षेत्र से ताल्लुक रखती हैं और उनकी भाषाई पृष्ठभूमि कन्नड़ तथा तेलुगु से जुड़ी है।
यूजर्स ने जावेद अख्तर के समर्थन की सराहना करते हुए उनकी इस गलती की ओर ध्यान दिलाया। इसके बाद जावेद अख्तर ने अपनी गलती स्वीकार की और स्पष्ट किया कि वह रश्मिका को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते थे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने रश्मिका की एक फिल्म तमिल भाषा में देखी थी, इसी वजह से उनसे यह गलती हुई।
उन्होंने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि मुद्दा तमिल, तेलुगु, मलयालम या कन्नड़ का नहीं है। अगर कोई व्यक्ति हमारी भाषा बोलने की कोशिश करता है, भले ही उसका उच्चारण अलग हो, तो उसकी सराहना की जानी चाहिए।
अंग्रेजी के उच्चारण का भी दिया उदाहरण
जावेद अख्तर ने अपनी बात समझाने के लिए अंग्रेजी भाषा का उदाहरण भी दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई भारतीय अंग्रेजी बोलते समय अलग लहजे का इस्तेमाल करता है, तो क्या किसी अंग्रेज व्यक्ति को उसका मजाक उड़ाना चाहिए? उन्होंने कहा कि दूसरों के उच्चारण का मजाक बनाने से पहले लोगों को अपने व्यवहार पर भी विचार करना चाहिए।
जावेद अख्तर के इस बयान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या किसी भाषा को बोलने का एक ही सही लहजा हो सकता है। भाषा संवाद का माध्यम है और अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों का उच्चारण उनकी भाषाई पृष्ठभूमि से प्रभावित होता है।









