डेस्क : अभिनेता गजेंद्र चौहान ने अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (एसआरएफटीआई) में छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर दिए गए बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। चौहान ने शाह के विचारों को एकतरफा बताते हुए कहा कि उन्हें किसी भी मुद्दे पर टिप्पणी करने से पहले उसके सभी पहलुओं को समझना चाहिए।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, नसीरुद्दीन शाह ने बीजेपी की आलोचना करते हुए कोलकाता स्थित एसआरएफटीआई के प्रदर्शनकारी छात्रों का समर्थन किया था। इसके बाद गजेंद्र चौहान ने उनके बयान पर असहमति जताई और कहा कि एक वरिष्ठ कलाकार होने के नाते उन्हें अपनी बात अधिक संतुलित तरीके से रखनी चाहिए।
शाह की टिप्पणी पर जताई नाराजगी
गजेंद्र चौहान ने बीजेपी के लिए नसीरुद्दीन शाह की ओर से इस्तेमाल की गई भाषा पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि किसी राजनीतिक दल की आलोचना करते समय भाषा की मर्यादा का ध्यान रखना जरूरी है। चौहान के अनुसार, लोकतंत्र में जनता के फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए और राजनीतिक मतभेदों को संवाद के माध्यम से व्यक्त करना चाहिए।
उन्होंने नसीरुद्दीन शाह की अभिनय प्रतिभा की सराहना करते हुए उनके राजनीतिक विचारों से असहमति जताई। चौहान ने कहा कि शाह के बयानों और वीडियो में अक्सर किसी मुद्दे का एक ही पक्ष सामने आता है, जबकि किसी भी मामले को समझने के लिए उसके दोनों पहलुओं पर विचार करना जरूरी है।
एसआरएफटीआई में छात्रों के आंदोलन का मामला
कोलकाता स्थित सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट में छात्रों का विरोध प्रदर्शन संस्थान के प्रशासन और कुलपति संतोष अजमेरा से जुड़े विवाद के बीच चर्चा में है। प्रदर्शनकारी छात्र कुलपति के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान छात्रों की सुरक्षा और संस्थान के प्रशासनिक रवैये को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
नसीरुद्दीन शाह ने इस मामले में छात्रों के समर्थन में अपनी बात रखी थी और सरकार की नीतियों की आलोचना की थी। वहीं, गजेंद्र चौहान ने विवाद के समाधान के लिए बातचीत और सकारात्मक पहल पर जोर दिया। उनका कहना है कि विरोध के साथ-साथ संबंधित पक्षों के बीच संवाद भी जरूरी है।
राजनीतिक विचारों को लेकर फिल्म जगत में बहस
नसीरुद्दीन शाह और गजेंद्र चौहान के बयानों से फिल्म जगत में राजनीतिक विचारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बहस फिर तेज हो गई है। एक ओर शाह ने छात्रों के समर्थन में सरकार की आलोचना की, तो दूसरी ओर चौहान ने उनके दृष्टिकोण को एकतरफा बताते हुए संतुलित विचार रखने की सलाह दी।
इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े कलाकारों को राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय रखते समय किन पहलुओं का ध्यान रखना चाहिए।
प्रकाशन से पहले ध्यान दें: मूल रिपोर्ट से गजेंद्र चौहान के बयान के सटीक शब्दों और एसआरएफटीआई विवाद के विवरण का मिलान कर लें। बिना पुष्टि के किसी कथन को सीधे उद्धरण के रूप में प्रकाशित न करें।









