नेपोटिज्म पर सारा अली खान का दोटूक जवाब, परिवार से मिले फायदे पर भी की बात

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डेस्क : अभिनेत्री सारा अली खान ने एक बार फिर फिल्म इंडस्ट्री में नेपोटिज्म यानी भाई-भतीजावाद को लेकर अपनी बात रखी है। सारा का कहना है कि उनके लिए यह कहना सही नहीं होगा कि उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में परिवार की पहचान का कोई फायदा नहीं मिला, लेकिन उन्होंने अपने करियर में आने वाली चुनौतियों का सामना भी खुद किया है।

हाल ही में Filmfare को दिए एक इंटरव्यू में सारा ने अपने माता-पिता, फिल्मी करियर और नेपोटिज्म को लेकर खुलकर बातचीत की। उन्होंने कहा कि वह अपनी मां अमृता सिंह के साथ रहती हैं और ऐसा नहीं हुआ कि उनके पिता सैफ अली खान फिल्म निर्माताओं के दफ्तरों में जाकर उनके लिए काम मांगते रहे हों या उन्हें फिल्मों में लेने के लिए लोगों से गुजारिश करते रहे हों।

नेपोटिज्म पर क्या बोलीं सारा?

सारा अली खान ने कहा कि नेपोटिज्म आज एक नकारात्मक शब्द बन गया है। उनके मुताबिक, इस बहस में कई बार कलाकारों की अपनी मेहनत और काम को नजरअंदाज कर दिया जाता है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि फिल्मी परिवार से आने के कारण उन्हें पहचान और अवसरों तक पहुंच बनाने में मदद मिली है।

अभिनेत्री के अनुसार, फिल्मी परिवार में जन्म लेना उनके अपने हाथ में नहीं था। ऐसे में केवल पारिवारिक पृष्ठभूमि के आधार पर किसी कलाकार के प्रयासों को खारिज करना उचित नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि फिल्मी परिवारों से आने वाले कलाकारों को शुरुआत में कुछ अतिरिक्त अवसर और पहचान मिल सकती है।

मां अमृता सिंह के साथ बीता बचपन

सारा ने अपने बचपन के बारे में बात करते हुए बताया कि उनकी मां अमृता सिंह ने अकेले ही उनकी परवरिश में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि उनकी मां ने एक ही समय में माता और पिता दोनों की जिम्मेदारियां निभाईं।

सारा के मुताबिक, उनके पिता उनकी जिंदगी में हमेशा मौजूद रहे और जरूरत पड़ने पर सलाह भी देते रहे, लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी में उनकी मां ने ही हर परिस्थिति को संभाला। अभिनेत्री ने अपनी मां को मजबूत व्यक्तित्व वाली महिला बताते हुए उनके योगदान को अहम बताया।

परिवार की पहचान के साथ खुद को साबित करने की चुनौती

सारा अली खान ने यह भी माना कि फिल्मी परिवार से आने के कारण उन्हें इंडस्ट्री में शुरुआती पहचान और अवसर मिले। लेकिन उनके मुताबिक, इसके साथ ही उनसे अपेक्षाएं भी अधिक रहती हैं और उन्हें लगातार अपने अभिनय के दम पर खुद को साबित करना पड़ता है।

गौरतलब है कि सारा ने वर्ष 2018 में फिल्म ‘केदारनाथ’ से बॉलीवुड में कदम रखा था। इसके बाद वह ‘सिंबा’, ‘अतरंगी रे’ और ‘जरा हटके जरा बचके’ जैसी फिल्मों में नजर आईं।

सारा के बयान ने एक बार फिर बॉलीवुड में भाई-भतीजावाद, अवसरों की समानता और कलाकारों की मेहनत को लेकर चल रही बहस को चर्चा में ला दिया है।