डेस्क : कैंसर के मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 137 दवाओं के 543 ब्रांडों की कीमतों में कटौती की है। कुछ दवाओं के दाम 93 प्रतिशत से भी अधिक घटाए गए हैं। संशोधित कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी। इस फैसले से कैंसर के इलाज पर होने वाले खर्च में कमी आने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) की ओर से जारी नई मूल्य सूची के अनुसार, कैंसर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली कई महंगी दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमतें कम की गई हैं। इसका उद्देश्य मरीजों को उचित दरों पर दवाएं उपलब्ध कराना और लंबे समय तक चलने वाले इलाज का आर्थिक बोझ कम करना है।
कई महंगी दवाओं के दाम में बड़ी कटौती
नई दरों के तहत स्तन कैंसर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली पाल्बोसिक्लिब दवा के एक ब्रांड की 21 कैप्सूल वाली पैकिंग की कीमत 40,421.33 रुपये से घटाकर 2,720 रुपये कर दी गई है। वहीं, थायोटेपा इंजेक्शन के एक ब्रांड की 100 मिलीग्राम की शीशी का मूल्य 80,071.86 रुपये से घटाकर 7,150.33 रुपये कर दिया गया है।
इसके अलावा ओलापैरिब, बेवाकिजुमैब और डेनोसुमैब जैसी दवाओं के कुछ ब्रांडों की कीमतों में भी कमी की गई है। ये दवाएं कैंसर के विभिन्न प्रकारों के उपचार में इस्तेमाल की जाती हैं। हालांकि, कीमतों में वास्तविक कमी दवा के ब्रांड और पैकिंग के अनुसार अलग-अलग होगी।
दवा कंपनियों को नई दरें लागू करने के निर्देश
प्राधिकरण ने संबंधित दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए व्यापारिक मार्जिन पर सीमा तय की है। दवा कंपनियों को संशोधित कीमतों की जानकारी वितरकों और खुदरा विक्रेताओं तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। नई दरें लागू होने के बाद मरीजों को संबंधित दवाएं संशोधित अधिकतम खुदरा मूल्य पर मिलनी चाहिए।
इलाज के खर्च में कमी की उम्मीद
कैंसर का इलाज अक्सर लंबे समय तक चलता है और मरीजों को नियमित रूप से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। ऐसे में दवाओं की कीमतों में कमी से मरीजों और उनके परिवारों को आर्थिक राहत मिल सकती है। नई कीमतों की जानकारी राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण की वेबसाइट और ‘फार्मा सही दाम’ ऐप पर प्राप्त की जा सकती है।
दवा खरीदते समय मरीजों को संबंधित ब्रांड, पैकिंग और संशोधित अधिकतम खुदरा मूल्य की जांच करनी चाहिए।








