डेस्क : अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। बैंक ने दरों को 3.75 से 4 प्रतिशत के दायरे में बरकरार रखा है। हालांकि, अमेरिका में महंगाई का दबाव बने रहने के कारण भविष्य में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा रहा है। फेड के इस फैसले का असर भारतीय शेयर बाजार, विदेशी निवेश और सोने-चांदी की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
महंगाई पर फेड की नजर
फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति समिति के 12 सदस्यों में से 10 ने ब्याज दरें स्थिर रखने का समर्थन किया, जबकि दो सदस्य दरों में 0.25 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी के पक्ष में थे। लिसा कुक और बेथ हैमैक ने दरें स्थिर रखने के फैसले से असहमति जताई।
फेड के अनुसार, अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है। घरेलू खर्च और निवेश की स्थिति बेहतर है तथा रोजगार में भी बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद महंगाई का ऊंचा स्तर केंद्रीय बैंक के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। फेड का लक्ष्य महंगाई दर को 2 प्रतिशत तक लाना है।
दिसंबर की बैठक पर टिकी नजरें
फेडरल रिजर्व की अगली बैठक 8 और 9 दिसंबर 2026 को प्रस्तावित है। इस बैठक में ब्याज दरों को लेकर क्या फैसला होगा, यह महंगाई, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े आंकड़ों पर निर्भर करेगा। यदि महंगाई का दबाव बना रहता है, तो ब्याज दरों में बढ़ोतरी का विकल्प खुला रह सकता है। फिलहाल इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
भारतीय शेयर बाजार पर क्या होगा असर?
अमेरिकी ब्याज दरें वैश्विक निवेश की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यदि अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं और डॉलर मजबूत होता है, तो विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार जैसे उभरते बाजारों में निवेश को लेकर सतर्क हो सकते हैं। इससे घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।
वहीं, दरों में फिलहाल बढ़ोतरी नहीं होने से बाजार को कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, भारतीय शेयर बाजार की चाल केवल अमेरिकी फेड के फैसले पर निर्भर नहीं करेगी। कच्चे तेल की कीमतें, कंपनियों के वित्तीय नतीजे, डॉलर की स्थिति और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करेंगी।
सोने-चांदी की कीमतों पर भी असर संभव
अमेरिकी ब्याज दरों और डॉलर की चाल का असर सोने-चांदी की कीमतों पर भी पड़ सकता है। ब्याज दरें ऊंची रहने और डॉलर मजबूत होने की स्थिति में कीमती धातुओं पर दबाव आ सकता है। हालांकि, वैश्विक अनिश्चितता और निवेशकों की मांग भी इनकी कीमतों को प्रभावित करेगी।
कुल मिलाकर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को स्थिर रखकर फिलहाल कोई सख्त कदम नहीं उठाया है, लेकिन महंगाई को लेकर उसकी चिंता बरकरार है। ऐसे में भारतीय निवेशकों की नजर अब अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और दिसंबर में होने वाली फेड की अगली बैठक पर रहेगी।









