डेस्क : पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी राजनीतिक उथल-पुथल अब पार्टी के संसदीय दल तक पहुंचती दिखाई दे रही है। कई सांसदों के दिल्ली पहुंचने और कुछ अन्य के भी राजधानी आने की चर्चाओं के बीच पार्टी नेतृत्व को लोकसभा में संभावित टूट की आशंका सताने लगी है। इसी पृष्ठभूमि में टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने संगठन में बड़े बदलाव शुरू कर दिए हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि लोकसभा में टीएमसी के 28 सांसदों में से यदि दो-तिहाई यानी 19 सांसद अलग होते हैं, तो दल-बदल कानून के तहत उन्हें अयोग्यता से राहत मिल सकती है। इसी कारण पार्टी नेतृत्व किसी भी संभावित टूट को रोकने के लिए सक्रिय हो गया है।
सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी ने पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में फेरबदल करते हुए वरिष्ठ नेताओं डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन स्थापित करने और बढ़ते असंतोष को नियंत्रित करने की रणनीति का हिस्सा है।
पार्टी के अंदर असंतोष का एक कारण सांसद और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली को भी माना जा रहा है। कुछ नेताओं का आरोप है कि संगठनात्मक निर्णयों में संवाद की कमी रही है, जिससे नाराजगी बढ़ी है। हालांकि पार्टी के कई वरिष्ठ नेता सार्वजनिक रूप से ममता बनर्जी के नेतृत्व के प्रति अपनी निष्ठा जता रहे हैं।
इस बीच, ममता बनर्जी 8 जून को होने वाली विपक्षी गठबंधन की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच सकती हैं। माना जा रहा है कि इस दौरे के दौरान पार्टी के असंतुष्ट नेताओं से भी संपर्क साधा जा सकता है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि विधानसभा स्तर पर सामने आई बगावत के बाद यदि संसदीय दल में भी असंतोष गहराता है, तो यह टीएमसी के लिए बड़ा संगठनात्मक संकट साबित हो सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व की रणनीति और असंतुष्ट नेताओं का रुख पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।


