डेस्क : पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी संकट गहराता दिखाई दे रहा है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी के करीब 22 सांसद संसद में अलग मोर्चा बनाने की तैयारी में हैं, जिससे ममता बनर्जी के नेतृत्व को बड़ा झटका लग सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा और राज्यसभा के कुछ सांसदों में नेतृत्व को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है। कई सांसदों के दिल्ली में सक्रिय होने और अलग राजनीतिक रणनीति पर चर्चा करने की खबरें भी सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि यह असंतोष केवल संगठनात्मक फैसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी के अंदर बढ़ते मतभेदों और नेतृत्व शैली को लेकर भी है।
इसी बीच राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि अगर यह सांसद वास्तव में अलग गुट बनाते हैं, तो टीएमसी के लिए संसद में स्थिति कमजोर हो सकती है। दिल्ली में विपक्षी खेमों की गतिविधियां भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
हालांकि अब तक तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। पार्टी के भीतर इस तरह की संभावित टूट की खबरों ने राजनीतिक सरगर्मी को और बढ़ा दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह अटकलें वास्तविकता में बदलती हैं, तो यह ममता बनर्जी के लिए केंद्र की राजनीति में एक गंभीर चुनौती साबित हो सकती है।


