भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज, पीएम मोदी की बैठक में भविष्य की रणनीति पर चर्चा


नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्यों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में भारत की आर्थिक वृद्धि को वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच और अधिक सुदृढ़ बनाने के उपायों पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में देश में जीवनयापन को आसान बनाने तथा व्यापार करने की सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस) को और बेहतर करने से जुड़े विभिन्न सुधारों पर भी विचार-विमर्श हुआ। परिषद के सदस्यों ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव का अपना आकलन भी प्रस्तुत किया।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पूरी दुनिया भू-राजनीतिक तनावों, व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताओं और असमान विकास दर जैसी चुनौतियों से जूझ रही है।

उल्लेखनीय है कि पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से आर्थिक मजबूती के लिए सात प्रमुख अपीलें की थीं। इनमें आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने, पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने, वर्क फ्रॉम होम को प्राथमिकता देने, ईंधन की खपत घटाने, एक वर्ष तक विदेशी यात्रा से बचने, स्वदेशी उत्पादों को अपनाने, खाना पकाने के तेल के उपयोग में कमी लाने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा सोने की खरीद को नियंत्रित करने जैसे सुझाव शामिल थे।

ईंधन कीमतों की अस्थिरता को देखते हुए प्रधानमंत्री ने नागरिकों से सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग, कारपूलिंग, माल ढुलाई में रेलवे के अधिक उपयोग तथा इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की भी अपील की थी।

इस बीच, ताज़ा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में बाजार की उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया है। वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वर्ष-दर-वर्ष 7.8 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित है, जबकि पूरे वित्त वर्ष के लिए 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

स्थिर कीमतों पर वास्तविक जीडीपी चौथी तिमाही में 87.77 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही के 81.40 लाख करोड़ रुपये की तुलना में अधिक है। इस अवधि में नाममात्र जीडीपी 94.65 लाख करोड़ रुपये रही, जिसमें 9.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वास्तविक जीडीपी 323.12 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है, जबकि नाममात्र जीडीपी 346.36 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 8.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) के आंकड़ों के अनुसार भी आर्थिक गतिविधियों में मजबूती देखी गई है। वर्ष 2025-26 में वास्तविक जीवीए में 7.9 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित है, जबकि नाममात्र जीवीए में 9.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। चौथी तिमाही में वास्तविक जीवीए 7.9 प्रतिशत और नाममात्र जीवीए 9.9 प्रतिशत बढ़ा।

आंकड़ों से स्पष्ट है कि द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र देश की आर्थिक वृद्धि के प्रमुख चालक बने हुए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में द्वितीयक क्षेत्र में 8.8 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र में 9.3 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित है, जबकि प्राथमिक क्षेत्र में 3.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें मुख्य योगदान कृषि और मत्स्य क्षेत्र का रहा है।

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