2031 तक भारत में 5जी उपभोक्ताओं की संख्या 110 करोड़ के पार पहुंचने का अनुमान


नई दिल्ली : भारत में 5जी सेवाओं का विस्तार तेज़ी से जारी है और वर्ष 2031 तक देश में 5जी ग्राहकों की संख्या 110 करोड़ (1.1 अरब) से अधिक होने का अनुमान है। यह कुल मोबाइल सदस्यताओं का लगभग 81 प्रतिशत हिस्सा होगा। यह जानकारी मंगलवार को जारी नवीनतम एरिक्सन मोबिलिटी रिपोर्ट में दी गई।

रिपोर्ट के अनुसार, सस्ते 5जी स्मार्टफोन, देश के लगभग सभी जिलों में नेटवर्क कवरेज का विस्तार तथा 5जी फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (एफडब्ल्यूए) सेवाओं के बढ़ते प्रसार ने 5जी अपनाने की गति को तेज किया है।

वर्ष 2025 के अंत तक भारत में 43 करोड़ 5जी सदस्य थे, जो कुल मोबाइल सदस्यताओं का 35 प्रतिशत थे। हालांकि 4जी अभी भी 46 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ प्रमुख मोबाइल तकनीक बनी हुई है, लेकिन आने वाले वर्षों में इसके उपयोग में तेज़ गिरावट दर्ज होने की संभावना है।

रिपोर्ट के अनुसार, 4जी ग्राहकों की संख्या 2025 में लगभग 57 करोड़ से घटकर 2031 तक करीब 16 करोड़ रह जाएगी, क्योंकि अधिकाधिक उपभोक्ता 5जी नेटवर्क की ओर स्थानांतरित होंगे।

मोबाइल डेटा खपत के मामले में भी भारत अपनी वैश्विक अग्रणी स्थिति बनाए रखेगा। वर्तमान में प्रति स्मार्टफोन औसत मासिक डेटा उपयोग 37 जीबी है, जो 2031 तक बढ़कर 70 जीबी प्रति माह तक पहुंच सकता है। यानी अगले छह वर्षों में डेटा खपत लगभग दोगुनी होने की संभावना है।

एरिक्सन इंडिया के प्रबंध निदेशक नितिन बंसल ने कहा कि भारत का तेजी से विकसित हो रहा 5जी पारिस्थितिकी तंत्र देश के डिजिटल परिदृश्य को नई दिशा दे रहा है। उनके अनुसार, उन्नत मोबाइल ब्रॉडबैंड और 5जी एफडब्ल्यूए आधारित सेवाएं उपभोक्ताओं के अनुभवों को बेहतर बना रही हैं।

उन्होंने कहा कि भारत का मजबूत और सुरक्षित 5जी ढांचा डिजिटल समावेशन, सुशासन और नवाचार को बढ़ावा देने के साथ-साथ ‘डिजिटल इंडिया’ कार्यक्रम की नींव को और मजबूत कर रहा है।

वैश्विक स्तर पर 2026 की पहली तिमाही में 5जी ग्राहकों की संख्या 3.1 अरब तक पहुंच गई है। एरिक्सन का अनुमान है कि 2031 तक यह संख्या बढ़कर 6.4 अरब हो जाएगी।

एरिक्सन के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी एरिक एकुडेन ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते उपयोग के साथ भविष्य की कनेक्टिविटी आवश्यकताओं का स्वरूप बदल रहा है। उनके अनुसार, मोबाइल नेटवर्क अब केवल कनेक्टिविटी प्रदान करने का माध्यम नहीं रह गए हैं, बल्कि वे विभिन्न डिजिटल अनुप्रयोगों की जरूरतों को पूरा करने वाले बुद्धिमान और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के रूप में विकसित हो रहे हैं।

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