नई दिल्ली : सर्वोच्च न्यायालय में एक मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने जूनियर वकीलों द्वारा सुनवाई स्थगित करने की मांग पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। अदालत में जब यह कहा गया कि वरिष्ठ अधिवक्ता उपलब्ध नहीं हैं और इसलिए मामले की सुनवाई किसी अन्य दिन की जाए, तब मुख्य न्यायाधीश ने इस प्रवृत्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि इसी तरह बार-बार स्थगन मांगा जाएगा तो न्यायालय का कामकाज कैसे चलेगा।
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि अदालतें मामलों की सूची पहले से जारी करती हैं ताकि पक्षकार और अधिवक्ता पर्याप्त तैयारी के साथ उपस्थित हो सकें। इसके बावजूद अंतिम समय में स्थगन की मांग करना न्यायिक समय की बर्बादी है। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि वकीलों को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए और केवल वरिष्ठ वकील की अनुपस्थिति को आधार बनाकर सुनवाई टालने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि देश की अदालतों में पहले से ही बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। ऐसे में अनावश्यक स्थगन न केवल न्यायिक प्रक्रिया को धीमा करता है बल्कि न्याय प्राप्त करने की प्रतीक्षा कर रहे पक्षकारों को भी प्रभावित करता है। न्यायालय ने संकेत दिया कि मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए सभी पक्षों को सहयोगात्मक रवैया अपनाना होगा।
गौरतलब है कि मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत लगातार न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और समयबद्ध बनाने पर जोर देते रहे हैं। हाल के महीनों में उन्होंने लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण, न्यायिक बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण तथा अदालतों में कार्यकुशलता बढ़ाने की आवश्यकता पर कई बार बल दिया है।


