जयपुर, 22 जून 2026, सोमवार। मानसरोवर स्थित अग्रवाल फार्म में सोमवार को ‘प्रभाव सकारात्मक सोच का’ विषय पर भव्य आध्यात्मिक सेमिनार का आयोजन हुआ। मुनि श्री तत्त्व रुचि जी “तरुण” एवं मुनि श्री संभव कुमार जी के पावन सान्निध्य में आयोजित इस सेमिनार में शहर के गणमान्य नागरिक, समाजसेवी और धर्मप्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
मुख्य उद्बोधन
मुनि श्री तत्त्व रुचि जी “तरुण” ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि मनुष्य का जीवन उसकी सोच का ही प्रतिबिंब होता है। “व्यक्ति की जैसी सोच होती है, वह वैसा ही बन जाता है। सकारात्मक सोच वाला व्यक्ति ऊंचाइयों को छूता है, जबकि नकारात्मक विचार व्यक्ति को पतन की ओर ले जाते हैं।” उन्होंने भगवान महावीर और आचार्य श्री भिक्षु के जीवन प्रसंगों से समझाया कि सकारात्मक सोच विपरीत परिस्थितियों में भी तनाव कम करती है, मनोबल बढ़ाती है और सहनशीलता प्रदान करती है।
मुनि श्री संभव कुमार जी ने कहा कि आज के समय में छोटी-छोटी बातों पर विचलित हो जाना आम बात हो गई है। नकारात्मकता न केवल स्वयं को परेशान करती है बल्कि आसपास के वातावरण को भी दूषित कर देती है। “सकारात्मकता ही वह शक्ति है जो संकट की घड़ी में धैर्य और आत्म-नियंत्रण का संबल देती है। शंका और संदेह उन्हीं को सताते हैं जो निषेधात्मक विचारों में जीते हैं।”
कार्यक्रम की रूपरेखा
सेमिनार का शुभारंभ चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर की स्तुति से हुआ। उपस्थित श्रद्धालुओं को सोच को सकारात्मक बनाने हेतु दीर्घश्वास का अभ्यास भी करवाया गया। कार्यक्रम का समापन एक दिवसीय त्याग संकल्प एवं मंगलपाठ के साथ हुआ।
मुख्य संदेश
मुनि श्री ने आह्वान किया कि अपनी सोच को ऊँची और पवित्र रखें, क्योंकि सोच का सीधा प्रभाव हमारे आचार, विचार और व्यवहार पर पड़ता है। सकारात्मक सोच ही तनावमुक्त और संतुलित जीवन का आधार है।


