नई दिल्ली : भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में वार्ताएं तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं। इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने भारत के व्यापारिक आंकड़ों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष में आई कमी और चीन के साथ व्यापार घाटे में हुई बढ़ोतरी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक नीतियों की आलोचना की।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि मोदी सरकार की आर्थिक नीति अमेरिका को खुश करने और चीन के सामने झुकने का माध्यम बन गई है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2025-26 में भारत का अमेरिका के साथ वस्तु व्यापार अधिशेष 34.4 अरब डॉलर रहा, जबकि वर्ष 2024-25 में यह 40.1 अरब डॉलर था। वहीं, चीन के साथ भारत का वस्तु व्यापार घाटा 2025-26 में बढ़कर 112.2 अरब डॉलर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष 99.2 अरब डॉलर था।
कांग्रेस लंबे समय से अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर सवाल उठाती रही है। फरवरी 2026 में दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापार ढांचे पर सहमति बनने के बाद से ही पार्टी इस समझौते की शर्तों को लेकर सरकार पर दबाव बना रही है। जयराम रमेश की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब दोनों देशों के बीच समझौते को अंतिम रूप देने के लिए गहन बातचीत जारी है।
उधर, अमेरिका के दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के ब्यूरो में उप सहायक विदेश मंत्री बेथनी पोलोस मॉरिसन ने संकेत दिया है कि भारत और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता अब लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका है।
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मॉरिसन ने कहा कि फरवरी 2026 में दोनों देशों ने जिस ऐतिहासिक व्यापार समझौते को पूरा करने की मंशा जताई थी, उसे अब अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह समझौता 1.4 अरब आबादी वाले भारतीय बाजार को अमेरिकी वस्तुओं के लिए पारस्परिक और दोनों पक्षों के लिए लाभकारी शर्तों पर खोलने का मार्ग प्रशस्त करेगा।
मॉरिसन ने यह भी बताया कि दोनों देशों का लक्ष्य वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए दोनों सरकारें तेजी से काम कर रही हैं।
इसी क्रम में मंगलवार को अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर और केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के बीच नई दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में अंतरिम व्यापार समझौते से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। यह वार्ता उस प्रक्रिया का हिस्सा है जिसकी शुरुआत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर की गई थी।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर जहां सरकार इसे आर्थिक अवसरों का नया द्वार बता रही है, वहीं विपक्ष इसके संभावित प्रभावों और शर्तों को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। ऐसे में आगामी दिनों में इस समझौते को लेकर राजनीतिक और आर्थिक बहस और तेज़ होने की संभावना है।


