डेस्क : दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में आए विनाशकारी दोहरे भूकंप ने भारी तबाही मचा दी है। 7.2 और 7.5 तीव्रता के इन भूकंपों ने कुछ ही सेकंड के अंतराल में कई शहरों को हिला दिया, जिससे इमारतें ढह गईं, बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ और हजारों लोग घायल हुए।
सरकारी और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, मृतकों की संख्या सैकड़ों तक पहुँच चुकी है, जबकि हजारों लोग घायल हैं और कई अब भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं।
भारत की त्वरित मानवीय प्रतिक्रिया
इस संकट की घड़ी में भारत ने मानवीय सहायता के तहत बड़ा कदम उठाते हुए ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ शुरू किया है। इस मिशन का उद्देश्य वेनेजुएला को आपदा राहत, चिकित्सा सहायता और आपातकालीन सामग्री उपलब्ध कराना है।
भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना के संयुक्त प्रयास से दो सी-17 ग्लोबमास्टर सैन्य परिवहन विमानों के जरिए राहत सामग्री भेजी गई है।
41 सदस्यीय मेडिकल टीम और राहत सामग्री रवाना
इस अभियान के तहत भारतीय सेना की एक विशेष 41 सदस्यीय मेडिकल टीम को भेजा गया है, जिसमें डॉक्टर और चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल हैं। यह टीम आपदा प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित चिकित्सा सहायता, सर्जरी और आपातकालीन उपचार प्रदान करेगी।
इसके साथ ही लगभग 35 टन से अधिक राहत सामग्री, दवाइयाँ और चिकित्सा उपकरण भी भेजे गए हैं।
‘भीष्म क्यूब’ की तैनाती
इस मिशन की एक प्रमुख विशेषता स्वदेशी रूप से विकसित ‘भीष्म क्यूब’ की तैनाती है। यह एक मोबाइल मॉड्यूलर फील्ड अस्पताल प्रणाली है, जिसे आपात स्थिति में तेजी से स्थापित किया जा सकता है और गंभीर रूप से घायल मरीजों के उपचार में उपयोग किया जाता है।
यह प्रणाली आपदा क्षेत्रों में चिकित्सा क्षमता को कई गुना बढ़ाने में सक्षम मानी जाती है।
भारत की वैश्विक मानवीय भूमिका
भारत ने हमेशा प्राकृतिक आपदाओं के समय अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सहायता की नीति अपनाई है। ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ इसी मानवीय दृष्टिकोण का विस्तार माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस आपदा पर संवेदना व्यक्त करते हुए भारत की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है। वहीं वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने भारत की मदद के लिए आभार व्यक्त किया है।
यह राहत अभियान न केवल आपदा प्रभावित लोगों के लिए जीवनरक्षक सहायता है, बल्कि भारत की वैश्विक मानवीय जिम्मेदारी और कूटनीतिक सहयोग की नीति को भी मजबूत करता है।


