‘मन की बात’ में पीएम मोदी का संदेश: आत्मनिर्भरता से मजबूत हो रहा भारत


नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में देश की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता से जुड़े हालिया रक्षा उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जून का महीना भारत के लिए ऐसे महत्वपूर्ण सफलताओं से भरा रहा है, जो हर नागरिक को गर्व से भर देती हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते छह महीनों में देश ने कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं, लेकिन जून में हुई प्रगति विशेष रूप से सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है।

उन्होंने भारतीय नौसेना में हाल ही में शामिल किए गए तीन स्वदेशी युद्धपोतों—आईएनएस दुनागिरी, आईएनएस संशोधक और आईएनएस अग्रेय—का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका डिजाइन और निर्माण पूरी तरह भारत में किया गया है, जो देश की आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल ही में कोलकाता में आयोजित नौसेना से जुड़े एक कार्यक्रम में इन जहाजों को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया, जिससे देश की समुद्री सुरक्षा क्षमता और मजबूत हुई है।

उन्होंने विमानन क्षेत्र में हुई प्रगति का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में निर्मित सी-295 सैन्य परिवहन विमान ने अपनी पहली सफल उड़ान पूरी की है। उन्होंने बताया कि ऐसे 40 विमान देश में ही तैयार किए जा रहे हैं, जिससे एमएसएमई क्षेत्र, एयरोस्पेस उद्योग और रोजगार के अवसरों को नई गति मिल रही है।

प्रधानमंत्री ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की उपलब्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में विकसित लंबी दूरी की भूमि-आक्रमण क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया है। यह परीक्षण 15 जून 2026 को ओडिशा तट स्थित डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया था।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के अनुसार, परीक्षण के सभी लक्ष्य सफल रहे और विभिन्न ट्रैकिंग प्रणालियों ने पूरे मिशन के डेटा को रिकॉर्ड किया। इस परियोजना का विकास विभिन्न डीआरडीओ प्रयोगशालाओं और भारतीय उद्योग भागीदारों के सहयोग से किया गया है, जिसमें वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान, बेंगलुरु को नोडल प्रयोगशाला बनाया गया है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस परीक्षण में भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये उपलब्धियाँ इस बात का संकेत हैं कि भारत भूमि से लेकर समुद्र और आकाश तक अपनी रक्षा क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है और आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

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