नई दिल्ली: केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी प्रस्ताव ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को लेकर चल रही प्रक्रिया को बड़ा झटका लग सकता है। संसद की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के तय समयसीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने की संभावना कम होती दिख रही है, जिससे मॉनसून सत्र में इस पर कोई ठोस प्रगति नहीं हो पाएगी।
सूत्रों के अनुसार, समिति को अपनी रिपोर्ट मॉनसून सत्र के अंतिम सप्ताह तक सौंपनी थी, लेकिन अब तक व्यापक स्तर पर राज्यों से परामर्श और बैठकों का काम पूरा नहीं हो पाया है। ऐसे में समिति अतिरिक्त समय की मांग कर सकती है।
इस देरी को सरकार के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि केंद्र लगातार प्रयास कर रहा है कि संवैधानिक संशोधन से जुड़े इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जाए, ताकि भविष्य में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जा सकें।
हालांकि विपक्षी दल लंबे समय से इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह संघीय ढांचे और राज्यों के अधिकारों को प्रभावित कर सकता है। वहीं सरकार का तर्क है कि इससे चुनावी खर्च कम होगा और शासन व्यवस्था अधिक स्थिर होगी।
जानकारी के मुताबिक, इससे जुड़े दो अहम विधेयक—संविधान (129वां संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक—जेपीसी के पास विचाराधीन हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समिति की रिपोर्ट में और देरी होती है, तो इस प्रस्ताव के लागू होने की समयरेखा भी आगे खिसक सकती है, जिससे यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और अधिक बहस का विषय बन सकता है।


