मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में मंगलवार को एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) सचिन अहीर ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया। इसे उद्धव ठाकरे खेमे के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
सचिन अहीर ने शिंदे गुट में शामिल होने के तुरंत बाद महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति (डिप्टी चेयरमैन) पद के लिए महायुति गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन भी दाखिल किया। नामांकन के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अन्य महायुति नेताओं की मौजूदगी ने उनके नए राजनीतिक सफर पर मुहर लगा दी।
सचिन अहीर को लंबे समय से उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है। ऐसे में उनका दल बदलना शिवसेना (यूबीटी) के लिए केवल संख्या का नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश का भी बड़ा नुकसान माना जा रहा है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) के छह लोकसभा सांसद भी शिंदे गुट में शामिल हो चुके हैं। लगातार हो रहे इन राजनीतिक घटनाक्रमों ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी पर दबाव बढ़ा दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महायुति द्वारा सचिन अहीर को विधान परिषद के उपसभापति पद का उम्मीदवार बनाना केवल एक संवैधानिक पद का चुनाव नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की बदलती राजनीतिक तस्वीर का संकेत भी है। विधान परिषद में महायुति के पास संख्या बल होने के कारण अहीर की दावेदारी को मजबूत माना जा रहा है।
सचिन अहीर का शिंदे खेमे में जाना ऐसे समय हुआ है जब महाराष्ट्र में शिवसेना के दोनों गुटों के बीच राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई लगातार तेज होती जा रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह घटनाक्रम राज्य की राजनीति पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।


