“हम पाकिस्तान का हिस्सा नहीं” — पीओके में सरकार विरोधी आंदोलन उग्र


डेस्क:रावलकोट (पीओके) में सरकार विरोधी आंदोलन मंगलवार को और तेज हो गया, जहां प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान सरकार के खिलाफ अपना विरोध और कड़ा कर दिया। ईदगाह मैदान में जारी विशाल प्रदर्शन के दौरान लोगों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह क्षेत्र पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है और यदि इस्लामाबाद की ओर से खाद्य आपूर्ति रोकी जाती रही तो वे अपने “अन्य विकल्प” अपनाने को मजबूर होंगे।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें किसी भी तानाशाही व्यवस्था को स्वीकार नहीं है, चाहे वह प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ हों या सेना प्रमुख असीम मुनीर। रावलकोट में एकत्र भीड़ ने आरोप लगाया कि सरकार नागरिकों पर सामूहिक दंड की नीति अपना रही है और बुनियादी सुविधाओं से वंचित कर रही है।

आंदोलन का नेतृत्व कर रही जम्मू कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेता सरदार अमन खान ने मंच से कहा कि स्थानीय लोग अब सरकारी राशन पर निर्भर नहीं हैं और सरकार को यह समझना चाहिए कि वास्तविक जरूरत किसकी किसे है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आपूर्ति व्यवस्था इसी तरह बाधित रही तो हालात और अधिक गंभीर हो सकते हैं।

पिछले कई दिनों से पीओके के विभिन्न क्षेत्रों में यह आंदोलन लगातार जारी है। जेएएसी के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी सस्ते राशन, बिजली, पानी, बेहतर सड़क व्यवस्था, रोजगार और भ्रष्टाचार मुक्त शासन जैसी मांगें उठा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन उनकी मूलभूत समस्याओं की अनदेखी कर रहा है।

इस बीच, पाकिस्तान सरकार की ओर से आंदोलन को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया है। अधिकारियों पर आरोप है कि वे दबाव बनाने के लिए खाद्यान्न, ईंधन और दवाइयों की आपूर्ति में बाधा डाल रहे हैं, जिससे कई क्षेत्रों में स्थिति और गंभीर हो गई है। बाजारों में आवश्यक वस्तुओं की भारी कमी देखी जा रही है और आम जनजीवन प्रभावित है।

सरकार की ओर से जेएएसी पर आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत कार्रवाई भी की गई है, जिसमें संगठन के कई प्रमुख नेताओं के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ये कदम लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन हैं।

जून की शुरुआत से ही पीओके के कई हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट और सोशल मीडिया सेवाएं भी बंद हैं, जिससे आंदोलन से जुड़ी जानकारी बाहर नहीं जा पा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह प्रतिबंध आंदोलन की वास्तविक स्थिति को दबाने के लिए लगाया गया है।

लगातार लगभग दो सप्ताह से जारी इस गतिरोध के दौरान सुरक्षा बलों के साथ झड़पों में अब तक कम से कम बाइस लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग घायल बताए जा रहे हैं। कई इलाकों में कर्फ्यू जैसे हालात बने हुए हैं और खाद्य संकट के कारण सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।

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