मानसरोवर की सफल धर्मयात्रा के बाद निर्माण नगर पहुंचे मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’


जयपुर : आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ एवं मुनिश्री संभव कुमार जी ने मानसरोवर क्षेत्र में लगभग दो सप्ताह तक चली अपनी धर्मप्रभावक यात्रा को सफलतापूर्वक सम्पन्न करने के बाद मंगलवार को महाप्रज्ञ इंटरनेशनल स्कूल, निर्माण नगर में मंगल प्रवेश किया। संतों के आगमन पर विद्यालय परिवार ने श्रद्धा और भक्ति के साथ उनका अभिनंदन किया तथा उनके पावन सान्निध्य में नए शैक्षणिक सत्र का शुभारम्भ हुआ।

विद्यालय की नव नियुक्त प्राचार्या मधु शेखावत, उपप्राचार्या चन्द्रकंवर शेखावत, व्यवस्थापक विकास खत्री, अर्जुन सिंह खंगारोत सहित शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने मुनिश्री के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर प्राचार्या मधु शेखावत ने कहा कि नए सत्र की शुरुआत संतों के पावन आशीर्वाद से होना विद्यालय के लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आचार्य श्री महाश्रमण जी तथा संतों की मंगल प्रेरणा से विद्यालय अपने शैक्षणिक एवं संस्कारगत लक्ष्यों को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाएगा।

इससे पूर्व संतों ने मानसरोवर के स्वर्ण पथ से विहार किया। यात्रा के दौरान अनेक श्रद्धालु श्रावक-श्राविकाओं ने सेवा का सौभाग्य प्राप्त किया। श्रद्धालुओं के अनुसार यह धर्मयात्रा आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत प्रेरणादायी, सफल एवं स्मरणीय रही।

विद्यालय प्रवास के दौरान मुनिश्री के सान्निध्य में प्रतिदिन आध्यात्मिक एवं नैतिक चेतना से जुड़े कार्यक्रम पूर्ववत संचालित होंगे। मंगलवार को उनके पावन सान्निध्य में प्रवचन एवं स्मृति सभा का आयोजन भी हुआ।

स्मृति सभा में सरदारशहर निवासी एवं जयपुर प्रवासी स्वर्गीय मोतीलाल राखेचा को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने जीवन के गहन आध्यात्मिक सत्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “जिंदगी की कथा अंततः मृत्यु की व्यथा के साथ समाप्त होती है। जन्म सभी का समान होता है, किंतु जीवन का अंत प्रत्येक व्यक्ति के कर्मों और जीवन-मूल्यों के अनुसार भिन्न होता है।”

उन्होंने आगे कहा कि जैसे प्रत्येक दिन की सुबह समान दिखाई देती है, किंतु प्रत्येक संध्या का स्वरूप अलग होता है, उसी प्रकार जन्म तो सभी का एक जैसा होता है, परंतु जीवन की सार्थकता इस बात पर निर्भर करती है कि व्यक्ति अपने जीवन को कितनी सदाचारपूर्ण, सेवा-प्रधान और मूल्यनिष्ठ दिशा देता है। उन्होंने शोकाकुल परिवार को धैर्य, आत्मबल और आध्यात्मिक दृष्टि बनाए रखने की प्रेरणा भी प्रदान की।

सभा में राजेश धाड़ेवा ने स्वर्गीय मोतीलाल राखेचा के व्यक्तित्व एवं परिवार का परिचय देते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं सुनील बोथरा ने विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं से प्राप्त संवेदना संदेशों का उल्लेख करते हुए सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

मानसरोवर की सफल धर्मयात्रा के उपरांत निर्माण नगर में संतों का आगमन श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक उत्साह का विषय बना हुआ है। विद्यालय में उनके प्रवास के दौरान प्रवचन, नैतिक प्रेरणा एवं संस्कारपरक कार्यक्रमों का लाभ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं विद्यार्थियों को प्राप्त होगा।

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