नई दिल्ली : देश की जिला अदालतों में महिलाओं के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए अदालत परिसरों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार और संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इसके लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत हो तो सरकार को कदम उठाने चाहिए, जरूरत पड़े तो टैक्स बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में अदालतों में महिलाओं के लिए सुविधाओं से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि महिला वकीलों, न्यायिक कर्मचारियों और अदालतों में आने वाली महिलाओं को सम्मानजनक और सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की न्याय व्यवस्था केवल फैसलों से नहीं, बल्कि बेहतर बुनियादी ढांचे से भी मजबूत होती है।
सुनवाई के दौरान अदालतों में महिलाओं के लिए अलग शौचालय, बैठने की व्यवस्था, चेंजिंग रूम, बच्चों की देखभाल जैसी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया गया। कई जिला और निचली अदालतों में अभी भी महिलाओं के लिए आवश्यक सुविधाओं का अभाव होने की बात सामने आई।
CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालतें न्याय का केंद्र होती हैं, इसलिए वहां आने वाले हर व्यक्ति को जरूरी सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने महिला वकीलों और कर्मचारियों की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए अदालत परिसरों में बेहतर व्यवस्थाएं विकसित करने पर जोर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में संबंधित पक्षों से जानकारी मांगी है और अदालतों में महिलाओं के लिए सुविधाओं को लेकर सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत बताई है।








