नई दिल्ली : संसद के मॉनसून सत्र के दौरान नीट पेपर लीक और दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर बुधवार को राज्यसभा में जमकर हंगामा हुआ। इस मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे तथा सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के बीच तीखी बहस देखने को मिली। खरगे ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा, जबकि नड्डा ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई पुलिस कार्रवाई को उचित ठहराया।
कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने छात्र संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि सादे कपड़ों में दिल्ली पुलिस की एक टीम माकपा कार्यालय में दाखिल हुई और जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष को गिरफ्तार करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई 2021 में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में की गई। ब्रिटास ने दावा किया कि आइशी घोष की गिरफ्तारी की कोशिश को हाल में जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
खरगे ने सरकार पर साधा निशाना
मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि यदि किसी राष्ट्रीय राजनीतिक दल के कार्यालय में पुलिस प्रवेश कर गिरफ्तारी की कोशिश करती है, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं से लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।
खरगे के बयान के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। हंगामे के बीच केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने खड़े होकर सरकार का पक्ष रखा।
नड्डा बोले- कानून हाथ में लेने पर पुलिस करेगी कार्रवाई
जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि वह स्वयं छात्र जीवन में आंदोलनों का हिस्सा रहे हैं और आपातकाल के दौरान उन्हें भी गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलन करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी सरकार और पुलिस की जिम्मेदारी है।
नड्डा ने कहा कि वह स्वयं छात्र कार्यकर्ता रहे हैं और आपातकाल के दौरान उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति कानून अपने हाथ में लेता है तो पुलिस को कार्रवाई करनी ही पड़ती है। उन्होंने विपक्ष से इस मामले को सनसनीखेज न बनाने की अपील करते हुए कहा कि आंदोलन करने वाले छात्रों को कानून-व्यवस्था से जुड़े परिणामों के लिए भी तैयार रहना चाहिए।
हंगामे के चलते दो बार स्थगित हुई कार्यवाही
खरगे और नड्डा के बीच बहस के बाद सदन में हंगामा बढ़ गया। इसके चलते राज्यसभा की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर भी विपक्षी सांसदों का हंगामा जारी रहा, जिसके बाद सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
विपक्षी सांसदों ने जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष की गिरफ्तारी के कथित प्रयास का मुद्दा उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा। इसके साथ ही नीट पेपर लीक के विरोध में दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग भी दोहराई गई। विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित रही।








