नई दिल्ली :देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹84,084 करोड़ की ‘समुद्र मंथन’ योजना को मंजूरी दे दी है। योजना का उद्देश्य समुद्री क्षेत्रों में तेल और गैस के अन्वेषण को बढ़ावा देना तथा आयात पर निर्भरता कम करना है।
योजना के तहत गहरे समुद्र और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों में तेल एवं गैस की खोज के लिए सरकार वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगी। प्रत्येक खोजी कुएं के लिए ₹650 करोड़ तक की सरकारी मदद देने का प्रावधान किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे उन परियोजनाओं को गति मिलेगी, जिनमें अधिक लागत और जोखिम के कारण निजी निवेश सीमित रहता है।
‘समुद्र मंथन’ योजना के तहत गहरे समुद्री क्षेत्रों में खोजी ड्रिलिंग, समुद्री डेटा जुटाने, नई तेल-गैस खोजों को उत्पादन में लाने के लिए आवश्यक साझा बुनियादी ढांचे तथा तेल-गैस क्षेत्र से जुड़े विनिर्माण और सेवा क्षेत्र को बढ़ावा दिया जाएगा।
योजना के लिए कुल ₹84,084 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसमें बड़ी राशि गहरे समुद्र में खोजी ड्रिलिंग और समुद्री डेटा संग्रह पर खर्च की जाएगी। इसके अलावा नई खोजों को उत्पादन तक पहुंचाने के लिए साझा बुनियादी ढांचा विकसित किया जाएगा।
सरकार के अनुसार, समुद्र में तेल और गैस की खोज बेहद खर्चीली और जोखिमपूर्ण होती है। कई बार करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी किसी कुएं से व्यावसायिक मात्रा में तेल या गैस मिलने की गारंटी नहीं होती। ऐसे में सरकारी वित्तीय सहायता से कंपनियों को नए क्षेत्रों में अन्वेषण के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
केंद्र सरकार का लक्ष्य घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ाकर देश की आयातित ऊर्जा पर निर्भरता कम करना है। सरकार को उम्मीद है कि योजना से नए हाइड्रोकार्बन भंडार की खोज के साथ-साथ निवेश, रोजगार और देश में तेल-गैस से जुड़े उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।








