नई दिल्ली : संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को लोकसभा में विपक्ष के भारी हंगामे के बीच दो महत्वपूर्ण विधेयक महज 14 मिनट में पारित कर दिए गए। दोनों विधेयकों पर सदन में कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई। विपक्षी सांसद विभिन्न मुद्दों को लेकर लगातार नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन करते रहे, इसी बीच सरकार ने विधायी कार्यवाही आगे बढ़ाई।
लोकसभा ने केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने संबंधी विधेयक और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के अधिकारों का विस्तार करने वाला विधेयक पारित किया।
हंगामे के बीच दोपहर बाद शुरू हुई कार्यवाही
मंगलवार सुबह विपक्ष के विरोध के कारण लोकसभा की कार्यवाही प्रभावित रही। इसके बाद सदन दोपहर दो बजे दोबारा शुरू हुआ। कार्यवाही शुरू होने के बाद भी विपक्षी सांसदों का विरोध जारी रहा।
इसी दौरान सरकार ने दोनों विधेयकों को सदन में आगे बढ़ाया और बिना विस्तृत चर्चा के इन्हें पारित करा लिया। पूरी प्रक्रिया करीब 14 मिनट में पूरी हुई।
केरल का नाम अब ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव
पहला विधेयक केरल के नाम में बदलाव से जुड़ा है। इसके तहत राज्य का आधिकारिक नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ किए जाने का प्रस्ताव है।
सरकार की ओर से इस बदलाव को राज्य के पारंपरिक और स्थानीय नाम से जोड़कर देखा जा रहा है। विधेयक लोकसभा में पारित हो चुका है, जबकि आगे की संसदीय प्रक्रिया पूरी होना बाकी है।
सहकारी विकास निगम के अधिकार बढ़ेंगे
दूसरा विधेयक राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम से संबंधित है। इसके जरिए निगम के वित्तीय अधिकारों का विस्तार करने का प्रस्ताव है।
मौजूदा व्यवस्था में निगम मुख्य रूप से सहकारी समितियों को वित्तीय सहायता देता है। संशोधन के बाद सहकारी क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को समर्थन देने वाले संस्थानों और संगठनों तक प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता का दायरा बढ़ाने की व्यवस्था की जा रही है।
विपक्ष का संसद में लगातार विरोध
लोकसभा में विधेयकों को पारित किए जाने के दौरान विपक्षी सांसदों का विरोध जारी रहा। विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार से जवाब की मांग कर रहा था और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी की मांग भी उठाई जा रही थी।
विपक्ष का आरोप है कि लगातार हंगामे के बीच महत्वपूर्ण विधेयकों को बिना पर्याप्त चर्चा के पारित कराया जा रहा है। दूसरी ओर, सत्तापक्ष ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया है।
संसद में चर्चा को लेकर फिर उठा सवाल
दोनों विधेयकों के बिना चर्चा पारित होने से संसद में विधायी प्रक्रिया और बहस को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। मानसून सत्र के दौरान इससे पहले भी कई विधेयक विपक्ष के विरोध के बीच बिना विस्तृत चर्चा के पारित किए जा चुके हैं।
मंगलवार की कार्यवाही ने सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव को एक बार फिर सामने ला दिया है।








