वॉशिंगटन: अमेरिकी नौसेना का प्रशांत क्षेत्र में तैनात विमानवाहक पोत यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन मध्य-पूर्व की ओर बढ़ रहा है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब लंबे समय से तैनात यूएसएस अब्राहम लिंकन पर आपूर्ति की कमी और जवानों की मानसिक सेहत को लेकर चिंताएं सामने आई हैं।
यूएसएस अब्राहम लिंकन ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान में सहयोग कर रहा है। यह विमानवाहक पोत 260 से अधिक दिनों से लगातार समुद्र में है, जो इसकी रिकॉर्ड लंबी निर्बाध तैनाती है। लंबे समय तक चल रहे इस अभियान को लेकर कई डेमोक्रेट सांसदों ने पेंटागन से जहाज पर मौजूद परिस्थितियों की जांच और जवाबदेही की मांग की है।
हालांकि, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने गुरुवार को जहाज की स्थिति को लेकर सामने आई खबरों को खारिज करते हुए कहा कि परिस्थितियों को “पूरी तरह गलत तरीके से पेश किया गया है।” उन्होंने कहा कि नौसेना जल्द से जल्द लिंकन के जवानों को घर वापस लाने और चालक दल में बदलाव करने की कोशिश कर रही है।
जॉर्ज वॉशिंगटन की बढ़ी मध्य-पूर्व की ओर बढ़त
अमेरिकी नौसेना के मुताबिक, यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन पिछले सप्ताह वियतनाम के दा नांग बंदरगाह से रवाना हुआ था। इसके बाद इसे एक क्रूजर और एक विध्वंसक पोत के साथ सिंगापुर जलडमरूमध्य से गुजरते हुए देखा गया।
नौसेना के एक अधिकारी ने पुष्टि की कि जॉर्ज वॉशिंगटन मलक्का जलडमरूमध्य में था। यह जलडमरूमध्य प्रशांत और हिंद महासागर को जोड़ता है और यहां से जहाज के मध्य-पूर्व की ओर बढ़ने का रास्ता खुलता है।
रिपोर्टों के मुताबिक, जॉर्ज वॉशिंगटन मध्य-पूर्व में तैनात दो अमेरिकी विमानवाहक पोतों में से एक के रूप में यूएसएस अब्राहम लिंकन की जगह ले सकता है। यदि ऐसा होता है तो कुछ समय के लिए प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी विमानवाहक पोत की मौजूदगी नहीं रहेगी।
आपूर्ति की कमी से बढ़ी परेशानी
यूएसएस अब्राहम लिंकन 21 नवंबर को सैन डिएगो से रवाना हुआ था और जनवरी में मध्य-पूर्व पहुंचा। इसके बाद 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान शुरू हुआ।
अमेरिकी नौसेना ने स्वीकार किया है कि संघर्ष के कारण मध्य-पूर्व में पारंपरिक आपूर्ति केंद्र प्रभावित हुए, जिससे विमानवाहक पोत पर कुछ आवश्यक वस्तुओं की कमी हुई।
नौसेना के अनुसार, मिशन की प्राथमिकताओं के तहत पहले खाद्य सामग्री, फिर स्वच्छता संबंधी सामान और उसके बाद डाक को प्राथमिकता दी गई। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि अब जहाज पर जवानों को साफ पानी और पौष्टिक भोजन उपलब्ध है।
लिंकन की वापसी पहले मई में निर्धारित थी, लेकिन लंबी तैनाती के कारण वह अब भी क्षेत्र में मौजूद है।
सांसदों ने मांगी जांच
कनेक्टिकट के सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल, जो सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति के सदस्य हैं, ने नौसेना नेतृत्व से कई सवालों के जवाब मांगे हैं। उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रहने के बीच इतनी लंबी तैनाती बेहद गंभीर विषय है।
एरिजोना के सीनेटर और पूर्व मरीन रूबेन गैलेगो ने भी जहाज पर जवानों की स्थिति को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि वह जहाज के हालात का जायजा लेने के लिए एक द्विदलीय प्रतिनिधिमंडल के दौरे की कोशिश कर रहे हैं।
जवानों की मानसिक सेहत पर भी सवाल
यूएसएस लिंकन पर तैनात जवानों की मानसिक सेहत को लेकर भी सवाल उठे हैं। नौसेना ने कहा कि उसे जहाज पर आत्महत्या के विचार या आत्महत्या के प्रयासों में कोई बढ़ोतरी नजर नहीं आई है। हालांकि, अधिकारियों ने इससे संबंधित आंकड़े साझा करने से इनकार किया और इसके लिए परिचालन सुरक्षा तथा मरीजों की गोपनीयता का हवाला दिया।
नौसेना के एक अधिकारी के मुताबिक, अगस्त की शुरुआत में एक जवान समुद्र में गिर गया था। उसे तुरंत बचा लिया गया, जहाज के चिकित्सा विभाग ने उसका इलाज किया और बाद में आगे की चिकित्सा देखभाल के लिए उसे जहाज से बाहर भेज दिया गया। यह स्पष्ट नहीं किया गया कि घटना को आत्महत्या के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है या नहीं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने भी जहाज के चालक दल का बचाव करते हुए कहा कि 260 से अधिक दिनों में 10,000 विमान उड़ानें और करीब 15 लाख पाउंड आयुध का इस्तेमाल करने के बावजूद अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के जवान मजबूती से डटे हुए हैं।
लंबे अभियानों से बढ़ रहा दबाव
लिंकन को लेकर उठे सवाल अमेरिकी नौसेना के विमानवाहक पोतों और उनके चालक दल पर लंबे समय से पड़ रहे दबाव की व्यापक तस्वीर का हिस्सा हैं।
यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड मई में करीब 11 महीने की तैनाती के बाद स्वदेश लौटा था। यह वियतनाम युद्ध के बाद उसकी सबसे लंबी तैनाती थी। इस दौरान जहाज ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियान में भी सहयोग किया। तैनाती के दौरान लॉन्ड्री क्षेत्र में आग लगने के कारण उसे मरम्मत के लिए भूमध्य सागर लौटना पड़ा था और सैकड़ों जवानों के सोने की व्यवस्था भी प्रभावित हुई थी।
इससे पहले 2024 और 2025 में यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ अभियानों में तैनात अमेरिकी नौसेना के कई जहाजों को भी लंबे अभियानों और परिचालन दबाव का सामना करना पड़ा था।
इस बीच अमेरिका ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी फिर से लागू कर दी है। रक्षा मंत्री हेगसेथ ने कहा है कि अमेरिका इस नाकेबंदी को “अनिश्चितकाल तक” जारी रख सकता है।
ऐसे में यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन का मध्य-पूर्व की ओर बढ़ना अमेरिकी नौसेना के लिए एक ओर क्षेत्र में सैन्य दबाव बनाए रखने की रणनीति को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर लंबे समय से तैनात जवानों की तैयारी, मनोबल और कल्याण को लेकर बढ़ती चिंताओं को भी सामने लाता है।








