नई दिल्ली : कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को विनायक दामोदर सावरकर पर की गई टिप्पणी से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज आपराधिक शिकायत और निचली अदालत की ओर से जारी समन को खारिज कर दिया।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने के लिए आवश्यक कानूनी मंजूरी उपलब्ध नहीं थी। अदालत ने इसी आधार पर शिकायत और मजिस्ट्रेट के आदेशों को निरस्त कर दिया।
भारत जोड़ो यात्रा के दौरान की थी टिप्पणी
यह मामला वर्ष दो हजार बाईस में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान महाराष्ट्र के अकोला में दिए गए बयान से जुड़ा है। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में सावरकर को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। इसके बाद अधिवक्ता नृपेंद्र पांडेय ने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने जानबूझकर सावरकर का अपमान किया और समाज में वैमनस्य फैलाने की कोशिश की।
लखनऊ की मजिस्ट्रेट अदालत ने दिसंबर दो हजार चौबीस में राहुल गांधी को समन जारी किया था। राहुल गांधी ने इस आदेश को चुनौती देते हुए पहले इलाहाबाद उच्च न्यायालय का रुख किया था। उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिलने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
जरूरी मंजूरी नहीं होने पर मामला खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में आवश्यक मंजूरी का कोई उल्लेख नहीं था। अदालत ने इसी कानूनी कमी को आधार बनाते हुए आपराधिक शिकायत और निचली अदालत के आदेशों को खारिज कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले को राहुल गांधी के लिए महत्वपूर्ण कानूनी राहत माना जा रहा है। हालांकि, सावरकर को लेकर राहुल गांधी की अन्य टिप्पणियों से जुड़े अलग मामले भी सामने आए हैं, इसलिए यह आदेश केवल इसी शिकायत और इससे जुड़े समन पर लागू होता है।








