नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लालकिले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक संकटों के बीच भारत मजबूत स्थिति में है। उन्होंने कहा कि देश में पेट्रोल, डीजल, गैस और खाद की कोई कमी नहीं है। प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोगों को संकट के समय देश में डर का माहौल बनाने में आनंद आता है, लेकिन पिछले 10-12 वर्षों में तैयार की गई व्यवस्थाओं का परिणाम है कि भारत बड़े संकटों के बावजूद अपने पैरों पर खड़ा है।
‘लोगों को डराया गया कि गैस-पेट्रोल नहीं मिलेगा’
पीएम मोदी ने कहा कि कोविड महामारी से लेकर पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट तक, देश के सामने कई बड़ी चुनौतियां आईं। उन्होंने कहा कि संकट के समय कुछ लोगों ने यह डर फैलाने की कोशिश की कि देश में वैक्सीन, गैस, डीजल या फर्टिलाइजर नहीं मिलेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने इन चुनौतियों के बीच अपनी तैयारियों को मजबूत किया और आज देश के पास गैस, पेट्रोल, डीजल और यूरिया पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।
3000 की यूरिया 300 रुपये में
किसानों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमत करीब 3000 रुपये तक पहुंच गई है, लेकिन भारत में किसानों को यह करीब 300 रुपये में उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने कहा कि डीएपी की अंतरराष्ट्रीय कीमत करीब 5000 रुपये तक पहुंच चुकी है, जबकि देश में किसानों को यह 1350 रुपये में उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार किसानों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों के दबाव से बचाने का प्रयास कर रही है।
‘संसाधनों का वेपनाइजेशन हो रहा’
प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा वैश्विक संकट में संसाधनों को भी हथियार की तरह इस्तेमाल करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल, डीजल, दवाइयां और यहां तक कि भूभाग को भी वेपनाइज किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में भारत के लिए आत्मनिर्भरता का रास्ता अपनाना बेहद जरूरी है। पीएम ने एमएसएमई क्षेत्र से वैश्विक अवसरों का लाभ उठाने और दुनिया से बेहतर तथा सस्ता उत्पाद उपलब्ध कराने का आह्वान किया।
आत्मनिर्भरता को बताया संकट से निपटने की ताकत
पीएम मोदी ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने आत्मनिर्भरता की दिशा में जो प्रयास किए हैं, उनका असर अब दिखाई दे रहा है। उनका कहना था कि दुनिया में वैश्वीकरण की दिशा बदल रही है और कई देश अपने हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे दौर में भारत को अपनी क्षमताओं और संसाधनों पर भरोसा बढ़ाना होगा।
लालकिले से अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने विकसित भारत @2047 के लक्ष्य पर भी जोर दिया और ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों, सेमीकंडक्टर और आत्मनिर्भरता को देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया।
पहली बार लालकिले पर गूंजा ‘वंदे मातरम्’
इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह की एक खास बात यह भी रही कि लालकिले के समारोह में पहली बार ‘वंदे मातरम्’ गाया गया। राष्ट्रीय गीत की विरासत के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर लालकिले की सजावट में भी ‘वंदे मातरम्’ को प्रमुखता दी गई।








